आदिवासियों के विरोध के आगे झुकी सरकार, बैलाडीला पहाड़ी में खनन पर लगी रोक

अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड को खदान का ठेका दिए जाने का हो रहा था विरोध.

Published date india.com Published: June 12, 2019 9:51 AM IST
आदिवासियों के विरोध के आगे झुकी सरकार, बैलाडीला पहाड़ी में खनन पर लगी रोक

रायपुर. छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में आदिवासियों के विरोध के बाद राज्य सरकार ने बैलाडीला क्षेत्र के डिपाजिट नंबर 13 में खनन गतिविधियों पर रोक लगा दी है. आदिवासियों के मुताबिक पहाड़ में उनके इष्ट देवता की पत्नी विराजमान है. राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि दंतेवाड़ा जिले के हिरोली गांव में एनएमडीसी बैलाडीला लौह अयस्क खान परियोजना के डिपाजिट 13 के संबंध में बस्तर के सांसद दीपक बैज और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम के नेतृत्व में बस्तर से आए प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात की.

मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और कहा कि इस मामले में राज्य शासन की जो भूमिका है, उसे निभाया जाएगा. अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री बघेल ने कहा है कि प्रतिनिधिमंडल के द्वारा इस क्षेत्र में अवैध रूप से वनों की कटाई की शिकायत की जांच की जाएगी तथा नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी. इसी तरह प्रभावित क्षेत्र में वन कटाई का कार्य तत्काल रोका जाएगा. संबंधित क्षेत्र में परियोजना से संबंधित संचालित कार्यों पर भी रोक लगाई जाएगी. प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि खदान हस्तानांतरण आदि प्रक्रिया में ‘पंचायत स्तर पर विस्तार का कानून अधिनियम 1996 (पेशा)‘ के तहत वर्ष 2014 में आयोजित ग्राम सभा का पालन नहीं किया गया तथा फर्जी रूप से ग्राम सभा आयोजित की गई. मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधि मंडल को आश्वस्त किया कि फर्जी ग्राम सभा के आरोप की जांच कराई जाएगी.

मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल की मांग पर कहा कि संबंधित विषयों पर भारत सरकार से पत्राचार किया जाएगा और जनभावना की भी जानकारी दी जाएगी. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया की राज्य शासन अपने क्षेत्राधिकार की कार्रवाई करेगा लेकिन खदान पर आधिपत्य एवं स्वामित्व भारत सरकार के एनएमडीसी का है और उन्हें ही खदान के संबंध में कोई भी निर्णय लेने का अधिकार है. अधिकारियों ने बताया कि प्रतिनिधि मंडल ने इस क्षेत्र के निवासियों द्वारा एनएमडीसी तथा सीएमडीसी द्वारा अडानी इंटरप्राइजेज के माध्यम से माईनिंग कार्य के विरोध की जानकारी दी और यहां के आदिवासियों की जनभावनाओं, स्थितियों और मुद्दों की जानकारी दी. प्रतिनिधिमंडल ने अपने मांगों पर आधारित एक ज्ञापन भी मुख्यमंत्री को सौंपा.

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राज्य के दंतेवाड़ा जिले में स्थित बैलाडीला क्षेत्र की पहाड़ी में स्थित डिपोजिट नंबर 13 पर खनन के विरोध में इस महीने की सात तारीख से क्षेत्र के आदिवासी धरने पर हैं. आदिवासियों का कहना है कि राष्ट्रीय खनिज विकास निगम ने डिपाजिट 13 को अडानी समूह को सौंप दिया है और इस पहाड़ी में उनके इष्ट देवता प्राकृतिक गुरु नन्दराज की धर्म पत्नी पिटोरमेटा देवी विराजमान है. आदिवसियों के इस आंदोलन को क्षेत्र के स्थानीय नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने भी समर्थन दिया है.

बैलाडीला के डिपाजिट नंबर 13 में लौह अयस्क का भंडार है. इसे एनएमडीसी-सीएमडीसी (छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम) लिमिटेड (एनसीएल) के नाम से संयुक्त उद्यम कंपनी के तहत विकसित किया जा रहा है. एनसीएल के अधिकारियों के मुताबिक खुदाई और खदान के विकास का ठेका पिछले साल अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड को दिया गया था. वर्तमान में साइट पर एप्रोच रोड बनाने के लिए पेड़ काटने का काम चल रहा है. एनसीएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) वी एस प्रभाकर ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा आगे निर्णय लेने तक डिपाजिट 13 में अब कोई गतिविधियां नहीं की जाएगी.

जब इस परियोजना के लिए फर्जी ‘ग्रामसभा’ संबंधी आरोपों के बारे में पूछा गया तब प्रभाकर ने कहा कि यह जिला प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में है और यह देखना उनकी जिम्मेदारी थी. अधिकारी ने पहले कहा था कि खनन गतिविधियों से आदिवासियों के पवित्र स्थान को नुकसान नहीं होगा. खनन के शुरू होने के बाद भी वह उस स्थान पर पूजा करना जारी रख सकते हैं.

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