जसप्रीत बुमराह (Jasprit Bumrah), मोहम्मद शमी (Mohammed Shami), इशांत शर्मा (Ishant Sharma) और उमेश यादव (Umesh Yadav) जैसे तेज गेंदबाजों के दम पर भारतीय टीम ने विश्व स्तर का पेस अटैक तैयार किया है, जिसके दम पर भारत ने टेस्ट फॉर्मेट में शानदार प्रदर्शन किया है। इस पैस अटैक ने जहां टीम इंडिया को विश्व क्रिकेट के शीर्ष पर पहुंचने और वहां बने रहने में अहम भूमिका निभाई है, वहीं सभी गेंदबाजों के शानदार फॉर्म की वजह से स्क्वाड में जगह पाने की प्रतिद्वंदिता काफी बढ़ गई है। हालांकि तेज गेंदबाज उमेश का इसे स्वस्थ प्रतिस्पर्धा मानते हैं।

उमेश ने कहा, ‘‘हम चारों अब उस स्तर पर हैं जहां आप भविष्यवाणी नहीं कर सकते हो कि एक समय में कौन तीन खेलेंगे। ऐसा स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के कारण है। मैं इसे बहुत अच्छी बात मानता हूं कि हम खिलाड़ियों को रोटेट कर रहे हैं क्योंकि इससे हम लंबे समय तक खेल में बने रहेंगे और ज्यादा मैच जीतेंगे।’’

यादव का कहना है वर्कलोड मैनेजमेंजमेंट की नीति की वजह से सभी को पर्याप्त मौके मिलते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जो भी अच्छा प्रदर्शन करेगा वो टीम का हिस्सा होगा। सबसे महत्वपूर्ण मौकों का पूरा फायदा उठाना है। जब मैं बुमराह, इशांत और शमी को देखता हूं तो उनसे सीखने की कोशिश करता हूं। सीखना कभी रुकता नहीं है।’’

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दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में बुमराह की जगह टीम में आए उमेश ने पिछली दो सीरीज (दक्षिण अफ्रीका, बांग्लादेश) के चार मैचों में कुल 23 विकेट हासिल किए। हालांकि विदेशी जमीन पर उनके प्रदर्शन को लेकर अब भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

इस पर भारतीय तेज गेंदबाज ने कहा, ‘‘अमूमन जिन परिस्थितियों में आप ज्यादा खेलते हो आपको उनके बारे में ज्यादा पता होता है और आप अपनी रणनीति पर अच्छी तरह से अमल करते हो। हां मैं इस धारणा से सहमत हूं कि कोई खास गेंदबाज भारतीय या एशियाई परिस्थितियों में अच्छा प्रदर्शन करता है।’’

भारत के लिए अब तक 45 टेस्ट मैच खेल चुके उमेश ने विदेशी धरती पर 17 मैच खेले हैं, जहां उन्होंने 46 विकेट हासिल किए हैं। विदेशों में उमेश का टेस्ट औसत 42.19 का है जो कि उनके कुल औसत (30.26) ज्यादा है। वहीं विदेशों में उनकी इकॉनामी रेट (3.58 से 4.15) में भी इजाफा होता है।

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उन्होंने आगे कहा, ‘‘लेकिन अगर आप इंग्लैंड की परिस्थितियों में अधिक मैच खेलोगे तो वहां भी अच्छा प्रदर्शन करोगे। उपमहाद्वीप से बाहर इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका में मैंने बहुत कम मैच खेले हैं। मैंने केवल ऑस्ट्रेलिया में कुछ टेस्ट मैच खेले हैं। इसलिए शायद ऐसी धारणा बनी क्योंकि कम मैच का मतलब है कि आपके नाम पर विकेट भी कम होंगे।’’