दुनिया के महान तेज गेंदबाज वसीम अकरम (Wasim Akram) अपने देश की राष्ट्रीय टीम की कोचिंग से दूर रहने में ही भलाई समझते हैं. उन्होंने इसका कारण भी बताया है. इस पूर्व लेफ्ट आर्म तेज गेंदबाज ने पाकिस्तान के एक टीवी चैनल पर विस्तार से इसका कारण भी समझाया है कि आखिर उन्होंने पाकिस्तान क्रिकेट टीम की कोचिंग करने कभी अपनी रुचि क्यों नहीं दिखाई.Also Read - Asia Cup Hockey : आखिरी पलों में चूकी टीम इंडिया, पाकिस्तान के खिलाफ मैच 1-1 से ड्रॉ

स्विंग के सुल्तान के रूप में जाने वाला यह तेज गेंदबाज आज भी वनडे क्रिकेट में सर्वाधिक विकेट (502) लेने के मामले में नंबर दो पर हैं. पाकिस्तान की कोचिंग न करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वह यहां की अत्याधिक अपेक्षा के स्वभाव के चलते हमेशा ही इस पद से दूर रहे हैं. Also Read - भारत-पाकिस्‍तान लाइव स्‍ट्रीमिंग: हॉकी एशिया कप में आज IND vs PAK आमने-सामने, जानें कहां और कैसे देखें मुकाबला

अकरम यूट्यूब चैनल ‘क्रिकेट पाकिस्तान’ से बात कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने कहा, ‘मैं यहां इस अत्याधिक अपेक्षाओं के चलते इस रोल के लिए फिट नहीं बैठता. हालांकि मैं पीएसएल के जरिए और आईसीसी टूर्नामेंट्स के दौरान उन खिलाड़ियों की मदद के लिए हमेशा उपलब्ध हूं, जिन्हें मेरी जरूरत महसूस होती है.’ Also Read - श्रीलंका में आर्थिक संकट के बीच ACC ने ढूंढा वैकल्पिक आयोजन स्‍थल, अगस्‍त के अंत में होना है टूर्नामेंट

उन्होंने कहा, ‘जब आप कोच बनते हो तो आपको कम से कम 200 से 250 दिन या करीब एक साल टीम के साथ चाहिए होता है, जिसमें काफी काम करना पड़ता है. मुझे नहीं लगता कि मैं इतना वक्त निकाल सकता हूं क्योंकि मुझे पाकिस्तान के बाहर काफी काम होता है क्योंकि मेरा परिवार भी यहां से बाहर रहता है लेकिन सभी के पास मेरा नंबर है और मैं उनकी मदद को तैयार हूं.’

इसके अलावा अकरम ने कहा कि मैं यहां के लोगों के कारण भी इस जिम्मेदारी से दूर ही रहना पसंद करता हूं. अकरम ने कहा कि यहां के लोग और फैन्स का दुर्व्यवहार किसी से छिपा नहीं है, जब टीम बुरा प्रदर्शन करती है तो वह सबसे ज्यादा बदतमीजी और रूखापन कोच पर दर्शाते हैं. उन्होंने कहा कि टीम के प्रदर्शन में कोच का कोई हाथ नहीं होता क्योंकि मैदान पर खेलने के लिए कोच नहीं उतरता है, बल्कि वह तो मैदान से बाहर मैच के अनुमान के हिसाब से योजनाएं तैयार करता है, जिसे टीम को लागू करना होता है.