
Arun Kumar
2013 में अमर उजाला हिंदी दैनिक अखबार से जुड़ा और यहां 4 साल काम करने के बाद साल 2016 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में खेल डेस्क पर पत्रकारिता की. अब ... और पढ़ें
क्रिकेट के मैदान पर भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले मैचों को क्रिकेट की सबसे बड़ी प्रतिस्पर्धा के रूप में देखा जाता है. हाल के कुछ मैचों को छोड़ दिया जाए तो दुनिया भर के क्रिकेट फैन्स इन दोनों टीमों की प्रतिद्वंद्विता का लुत्फ लेते दिखते थे. लेकिन हाल ही में दोनों देशों के बीच हुए सैन्य संघर्ष के बाद दोनों देशों के रिश्ते मैदान पर भी अच्छे नहीं है और उनके बीच जारी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता खेल के मैदान पर भी साफ दिखी. इस बीच इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर और विश्लेषक माइकल आथर्टन ने ICC को यह सलाह दी है कि भविष्य में इन दोनों देशों के बीच मैचों आयोजित नहीं किए जाएं. भले ही इन मैचों से ICC को सबसे ज्यादा राजस्व ही क्यों नहीं मिलता हो.
माइकल आथर्टन ने द टाइम्स में लिखे अपने कॉलम में ICC को यह सलाह दी है. उन्होंने लिखा कि भले ही ICC कार्यक्रमों में भारत-पाकिस्तान के मैच आयोजित कराने के आर्थिक और कूटनीतिक कारण हो सकते हैं लेकिन अब समय आ गया जब इसे खत्म किया जाए क्योंकि दोनों देशों के बीच रिश्ते बिगड़ रहे हैं.
उन्होंने कहा, ‘भारत बनाम पाकिस्तान भले ही ऐसा मुकाबला है जो आपार आर्थिक महत्व रखता है और यही वह सबसे अहम कारण है, जिसके चलते ICC टूर्नामेंट्स के प्रसारण अधिकारों की कीमत इतनी ज्यादा होती है. हाल ही में 2023-27 के चक्र में यह करीब 3 अरब डॉलर है.’
उन्होंने यह भी बताया कि ये दोनों देश लंबे समय से द्विपक्षीय क्रिकेट नहीं खेल रहे हैं और इसके चलते ICC इवेंट्स में इनके मैचों और इनकी प्रतिद्वंद्विता का महत्व भी बहुत बढ़ गया है. इसलिए लिए ICC टूर्नामेंट्स में अब इनके मैच ज्यादा ही तय हो रहे हैं क्योंकि यह उन लोगों की बैलेंस शीट के लिए बेहद अहम हो गया है, जिनका खेल में कोई सीधा हित नहीं होता.’ उन्होंने दो टूक कहा कि ICC इन दोनों टीमों के बीच ‘टूर्नामेंट मुकाबले’ अपने आर्थिक फायदे के लिए तय करती है.
ध्यान देने वाली बात है कि भारत और पाकिस्तान ने 2013 से अब तक हुए हर ICC टूर्नामेंट में एक-दूसरे का सामना किया है. लेकिन एशिया कप में यह साफ हो गया है कि दोनों देशों के बीच होने वाले मुकाबले अब साफ तौर पर दोनों देशों के बीच चल रहे तनाव के कारण व्यापक तनावों का प्रतीक बन गए हैं.
अपने इस कॉलम में इस पूर्व क्रिकेटर ने लिखा, ‘अगर कभी क्रिकेट कूटनीति का माध्यम हुआ करता था, तो अब यह स्पष्ट रूप से व्यापक तनावों और प्रचार का प्रतीक बन चुका है. किसी गंभीर खेल के लिए अपने आर्थिक लाभ के अनुसार टूर्नामेंट मुकाबलों को तय करने का कोई महत्व नहीं है, और अब जबकि इस प्रतिद्वंद्विता का अन्य तरीकों से भी दोहन किया जा रहा है, तो यह महत्व और भी कम हो जाता है.’
आथर्टन ने ICC को सलाह देते हुए लिखा, ‘अगले प्रसारण अधिकार चक्र के लिए, ICC इवेंट्स से पहले मुकाबलों की ड्रॉ प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए. अगर दोनों टीमें हर बार आमने-सामने नहीं होतीं, तो भी कोई बात नहीं.’
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