
Arun Kumar
नमस्कार! मैं अरुण कुमार, फिलहाल India.com (Zee Media) में सीनियर सब एडिटर के रूप में स्पोर्ट्स डेस्क पर कार्यरत हूं. मैं पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं और ... और पढ़ें
नई दिल्ली. टीम इंडिया के पूर्व ओपनिंग बल्लेबाज और मौजूदा हेड कोच गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) खेल के मैदान पर एक अलग जुनून के लिए जाने जाते हैं. अपने खेल के दिनों में गंभीर बैटिंग पर हों या फिर फील्डिंग पर वह खेल में अपना सब कुछ कुछ झोंकते हुए नजर आते थे. उनका एक ही मकसद होता था, विरोधी को चारों खाने चित कर दो और उसने मुंह उठाने का मौका नहीं मिलना चाहिए. इस बीच विरोधी टीम का कोई खिलाड़ी उनसे उलझ जाए तो वह वहां भी पीछे नहीं हटते थे. पाकिस्तानी खिलाड़ियों के साथ उनकी तकरार हो या फिर आईपीएल में विराट कोहली के साथ ही उलझनें क्यों न हों. गंभीर के लिए मैच के वक्त विरोधी, विरोधी ही होता है. अब गौतम गंभीर के बचपन के कोच संजय भारद्वाज (Sanjay Bharadwaj) ने गंभीर के व्यवहार पर दुनिया को अपनी बात बताई है.
कोच भारद्वाज इस जुनूनी को खिलाड़ी को तब से जानते हैं, जब गंभीर किशोर उम्र के लड़के थे और वह उनकी अकैडमी में क्रिकेट का ककहरा सीख रहे थे. इसके बाद गंभीर ने भारतीय क्रिकेट में एक लंबा सफर तय किया. वह दिल्ली की रणजी टीम में आए, उसके कप्तान बने, भारतीय टीम के लिए तीनों फॉर्मेट में खेले और भारत की दो-दो वर्ल्ड कप विनिंग टीमों का हिस्सा रहे और इसमें उन्होंने उपयोगी योगदान भी दिया. वह इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के कप्तान भी बने और इस फ्रैंचाइजी को दो-दो खिताब भी जिताए.
बाद में वह इस टीम से बतौर मेंटॉर जुड़े और यहां भी पहली ही बार में उसे तीसरा खिताब जितवा दिया. इन कामयाबियों के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने उन्हें भारतीय टीम का हेड कोच नियुक्त किया है और अब वह टीम इंडिया के साथ अपने पहले असाइनमेंट श्रीलंका दौरे पर हैं, जहां टीम टी20 सीरीज में 3-0 से जीत चुकी है, जबकि वनडे सीरीज में 0-1 से पीछे है. इस बीच क्रिकेट जगत में गंभीर के व्यवहार को लेकर भी चर्चाएं खूब हैं.
उनके व्यवहार पर गंभीर के बचपन के कोच भारद्वाज ने कहा कि लोग अकसर गंभीर के जीत के प्रति जुनून को देखकर कन्फ्यूज हो जाते हैं और उन्हें घमंडी करार देते हैं. लेकिन ऐसा कतई नहीं हैं. उन्होंने कहा, ‘गौतम गंभीर एक बच्चा है. यहां तक कि आज भी वह एक नादान बच्चे की तरह ही हैं. उनमें किसी के खिलाफ कोई दुर्भावना नहीं है. वह बस एक 12 साल के बच्चे की तरह हैं.’
भारद्वाज ने कहा, ‘लोग सोचते हैं कि वह घमंडी हैं, लेकिन जीत के प्रति यह बस उनका व्यवहार है. वह बचपन से ही इसी तरह के एटीट्यूड के साथ खेलते रहे हैं.’ संजय भारद्वाज अंडर 19 वर्ल्ड कप विनिंग टीम का हिस्सा रहे युवा क्रिकेटर मनजोत कालरा के यूट्यूब चैनल पर चर्चा कर रहे थे.
इस इंटरव्यू में उन्होंने कहा, ‘लोग सोचते हैं कि वह घमंडी हैं लेकिन ऐसा कतई नहीं है. वह दिल के बहुत साफ हैं. वह विनम्र हैं, उन्होंने कई युवाओं का करियर बनाया है. वह बस उनका व्यवहार है. मैं जब उन्हें नेट्स में खूब पसीना बहाने के बाद मैच में खिलाता था, वह तब भी मैच हारकर रोते थे. वह तब भी हारना पसंद नहीं करते थे.’
गौतम गंभीर के बचपन के इस कोच ने कहा, ‘अगर आप अपने आराम के जोन में चले जाएंगे और हर समय मुस्कुराते ही रहेंगे, तब क्या आप जीतोगे? एक व्यक्ति जो यह समझता है कि कैसे जीता जाता है उसे यह भी आना चाहिए कि हार को कैसे नकारा जाता है.’
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