
Arun Kumar
नमस्कार! मैं अरुण कुमार, फिलहाल India.com (Zee Media) में सीनियर सब एडिटर के रूप में स्पोर्ट्स डेस्क पर कार्यरत हूं. मैं पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं और ... और पढ़ें
गुरुवार को अपने घर कोलकाता में लखऊ सुपर जाइंट्स के खिलाफ खेलने उतरी नाइट राइडर्स को सीजन की पहली जीत की खुशबू आने ही लगी थी कि अंतिम पलों में मुकुल चौधरी (Mukul Choudhary) ने अकेले दम पर धूमधड़ाका कर KKR से जीत छीन ली. 21 साल के मुकुल यहां नंबर 7 पर बैटिंग करने आए थे. लेकिन उनके साथ कोई दूसरा बल्लेबाज सामने वाले छोर पर नहीं बचा था. आयूष बडोनी (54) के आउट होने के बाद मोहम्मद शमी (1) 7वें विकेट के रूप में आउट हो चुके थे और तेज गेंदबाज आवेश खान मानों मैच की औपचारिकता पूरी करने के लिए क्रीज पर आए थे.
LSG को अंतिम 4 ओवर में 54 रनों की दरकार थी, जबकि उसके पास 3 विकेट शेष थे. यहां क्रिकेट की दुनिया में अब तक अनजान मुकुल यहां अपनी पहचान बनाने का मौका ताड़ गए. उन्होंने अपनी बैटिंग के दम पर मैच का रुख पलटने की कोशिश की और इस मुहिम में उन्होंने कार्तिक त्यागी, कैमरुन ग्रीन और वैभव अरोड़ा की अंतिम 4 ओवर में धुनाई करने की कोशिश की, जिसमें वह कामयाब होते चले गए.
पारी के 14वें ओवर में क्रीज पर आए मुकुल 16वें ओवर की समाप्ति तक 6 बॉल पर सिर्फ 2 रन बनाकर खेल रहे थे. इसके बाद उन्होंने 17वें ओवर में वैभव अरोड़ा के खिलाफ चौका और छक्का जड़ा तो फिर मुड़कर नहीं देखा. 27 बॉल की अपनी पारी में उन्होंने 2 चौके और 7 छक्के जमा दिए. अपने करियर का सिर्फ तीसरा IPL मैच खेल रहे मुकुल ने पहला छक्का भी इसी मैच में मारा था और उन्होंने अपनी पहली फिफ्टी भी अपने नाक की. अब फैन्स की जुबान पर मुकुल चौधरी का नाम हैं. उन्होंने आवेश खान के साथ अंतिम 4 ओवर में 54 रनों की अटूट साझेदारी कर टीम को यह जीत दिलाई.
फैन्स अब ये जानने को बेकरार हैं कि आखिर लखनऊ सुपर जायंट्स की टीम इस छुपे रुस्तम को ढूंढ कर कहां से लाई है. लेकिन मैच के बाद मुकुल ने खुद ही इन सारे सवालों के जवाब दिए. उन्हें इस शानदार जीत दिलाने के लिए प्लेयर ऑफ द मैच भी चुना गया. इस मौके पर उन्होंने बताया कि दूधिया रोशनी में यह उनका दूसरा ही मैच था. उन्होंने कहा कि क्रिकेटर बनकर अपने पिता का सपना पूरा करने की खुशी है.
घरेलू क्रिकेट में 2023 से राजस्थान के लिए खेलने वाले मुकुल झुंझुनूं से आते हैं. क्रिकेटर बनने की अपनी कहानी बताते हुए उन्होंने कहा, ‘मेरा सफर वास्तव में मेरे जन्म से पहले ही शुरू हो गया था. मेरे पिता का चाहत थी कि उनका बेटा एक दिन क्रिकेट खेले. उस समय हमारी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी. इसलिए मैं जल्दी शुरू नहीं कर सका. मैंने लगभग 12-13 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया.’
उन्होंने कहा, ‘उस समय ज्यादा अकैडमियां नहीं थीं. मेरे घर के पास एसबीसी क्रिकेट अकादमी नाम की नई अकादमी खुली थी, और मैंने वहां लगभग पांच-छह साल कोचिंग ली. इसके बाद मैं जयपुर चला गया, क्योंकि अगर आप हाई लेवल पर खेलना चाहते हैं तो आगे बढ़ना पड़ता है. पिछले चार साल से मैं जयपुर में प्रैक्टिस कर रहा हू.’ चौधरी ने बताया, ‘मैं उत्तर प्रदेश के खिलाफ अंडर-19 का मैच खेल रहा था और मैंने कम स्कोर वाले मैच में रन बनाए थे. तभी मेरे पिता को लगा कि मैं बड़ा क्रिकेटर बन सकता हूं. वह मेरा केवल दूसरा ही मैच था.’
बल्लेबाजी के दौरान दबाव के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘दबाव हमेशा रहता है. लेकिन मैं सोचता हूं कि भगवान ने मुझे यह मौका दिया है, इसलिए मैं अपनी क्षमता पर भरोसा करता हूं. यह मौका है जहां आप कुछ बड़ा कर सकते हैं या नाम कमा सकते हैं. इसलिए मैं दबाव की बजाए अवसर पर ध्यान देता हूं. मैं आखिरी गेंद तक खेलना चाहता था. मुझे अपने ऊपर इतना भरोसा है कि अगर मैं अंत तक नाबाद रहूंगा, तो टीम को जीत दिला सकता हूं.’
अपनी पारी में सात छक्के लगाने वाले चौधरी ने अपने पहले छक्के को बेहद खास बताया. उन्होंने कहा, ‘मैंने दो मैचों से छक्का नहीं लगाया था, इसलिए आज जो पहला छक्का लगाया, वह मेरे लिए खास था. हेलीकॉप्टर छक्का भी अच्छा था, लेकिन पहला छक्का सबसे खास रहा. मैंने सोचा था कि भले ही गेंदबाज चार परफेक्ट गेंदें डालें, कम से कम एक ऐसी गेंद होगी जिस पर मैं मैच का छक्का मार सकता हूं.’
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