ममता बनर्जी की पार्टी पर पूर्व क्रिकेटर ने लगाया वसूली का आरोप, बोले- टिकट के बदले मुझसे ₹5 करोड़ मांगे

Written By: Arun Kumar Updated by: Arun Kumar
Updated Date:May 5, 2026 5:42 PM IST

पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी ने पश्चिम बंगाल में TMC की करारी हार के साथ ही पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया. उन्होंने कहा कि उनसे इस बार चुनाव लड़ने के लिए 5 करोड़ रुपये मांगे गए थे, जिससे उन्होंने इनकार कर दिया.

भारतीय टीम के पूर्व क्रिकेटर और ममता बनर्जी सरकार में मंत्री रहे मनोज तिवारी ने तृणमूल कांग्रेस पर हाल ही में संपन्न हुए चुनावों में वसूली का बड़ा आरोप लगाया है. तिवारी ममता सरकार में खेल मंत्री रहे थे लेकिन इस बार पार्टी ने उनका टिकट काट दिया. सोमवार (4 मई) को चुनाव नतीजे आने के अलगे दिन इस पूर्व क्रिकेटर ने अपनी ही पार्टी पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर बड़ा आरोप लगाते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने कहा कि TMC ने उन्हें हावड़ा की शिबपुर सीट से टिकट देने से इसलिए मना कर दिया क्योंकि उन्होंने 5 करोड़ रुपये देने से इनकार कर दिया.

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40 वर्षीय इस पूर्व बल्लेबाज और बंगाल क्रिकेट के इतिहास में सबसे अधिक रन (10,195 प्रथम श्रेणी रन) बनाने वाला यह खिलाड़ी टीएमसी से प्रभावित होकर 2021 में पार्टी से जुड़ा था और उन्हें तब शिबपुर सीट से टिकट मिला था, जहां जीत दर्ज करने के बाद उन्हें मंत्री पद भी मिला. अब तिवारी का पार्टी की हार के साथ ही पार्टी की नीतियों और विचारधारा से मोहभंग हो गया है. उन्होंने कहा कि पार्टी की हार से वह हैरान नहीं है और ऐसा होना स्वभाविक ही था.

तिवारी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा, 'इस करारी हार से मुझे बिल्कुल भी हैरानी नहीं हुई है. जब पूरी पार्टी ही भ्रष्टाचार में लिप्त हो और किसी भी क्षेत्र में कोई विकास नहीं हुआ हो तो ऐसा होना ही था.'

उन्होंने कहा, 'सिर्फ वही लोग टिकट खरीद पाए जो भारी-भरकम रकम दे सकते थे. इस बार कम से कम 70 से 72 उम्मीदवारों ने टिकट पाने के लिए करीब पांच करोड़ रुपये दिए. मेरे से भी पैसे मांगे गए थे लेकिन मैंने देने से मना कर दिया. यह तो देखिए कि जिन लोगों ने पैसे दिए उनमें से कितने लोग चुनाव जीत पाए हैं.'

तिवारी ने कहा, 'जहां तक तृणमूल की बात है तो मेरे लिए अब वह अध्याय पूरी तरह से खत्म हो चुका है.' तिवारी ने कहा कि उनका राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं था, भले ही 2019 में तृणमूल ने उन्हें लोकसभा का टिकट देने की पेशकश की थी. आखिरकार 2021 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने शिबपुर से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की.

उन्होंने कहा, 'उस समय मैं IPL में पंजाब किंग्स (PBKS) के लिए खेल रहा था और रणजी ट्रॉफी में खेलने को लेकर गंभीर था, जब दीदी (ममता) चाहती थीं कि मैं लोकसभा चुनाव लड़ूं.'

तिवारी ने कहा, 'मैंने विनम्रता से मना कर दिया था लेकिन 2021 के चुनावों से पहले दीदी ने एक बार फिर मुझे बुलाया और कहा, 'मनोज मेरे पास तुम्हारे लिए एक संदेश है और अरूप तुम्हें वह संदेश देगा.' मुझे शिबपुर से चुनाव लड़ने के लिए कहा गया और मैंने सोचा कि मैं कुछ सार्थक बदलाव ला सकता हूं.'

तिवारी ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र की कमी है. उन्होंने कहा, 'मैंने ऐसी बैठकों में हिस्सा लिया है, जहां तृणमूल के सभी मंत्रियों को बुलाया जाता था. मुझे राज्य मंत्री के नाम पर बस एक लॉलीपॉप’ थमा दिया गया था, जिसका असल में कोई मतलब ही नहीं था. अगर मैं खड़ा होकर कहता, दीदी, मैं आपका ध्यान एक खास समस्या की ओर दिलाना चाहता हूं. तो वह बीच में ही हमें रोक देतीं और कहतीं, 'मेरे पास तुम लोगों के लिए समय नहीं है.'

तिवारी ने कहा कि हावड़ा जिले में सीवेज और ड्रेनेज प्रणाली के खराब होने की पुरानी समस्या को उनके बार-बार प्रयास करने के बावजूद कभी हल नहीं किया.

(एजेंसी से)

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