
Ezaz Ahmad
नमस्कार! मैं एजाज अहमद (Ezaz Ahmad), 1 नवंबर 2022 से अब तक India.Com (Zee Media) में स्पोर्ट्स डेस्क पर सीनियर सब एडिटर के पद कार्यरत हूं. मैं पिछले 12 वर्षों ... और पढ़ें
नई दिल्ली: एक खिलाड़ी का जीवन अक्सर चुनौतियों से भरा होता है, खासकर भारत में जहां कम्पटीशन काफी हाई होता है. इसके बावजूद भारतीय खेल जगत ऐसे कई खिलाड़ियों से भरा हुआ है जिन्होंने अपने करियर के दौरान काफी संघर्ष किया है. पूर्व भारतीय क्रिकेटर मनोज तिवारी (Manoj Tiwary) भी उन्हीं में से एक हैं. मनोज तिवारी ने भारत के लिए 12 वनडे और तीन टी20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं. तिवारी ने ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि जब वो 14 साल के थे तो वो अपने मां के साथ लोन खत्म करने के लिए पूरी सब्जी बेचा करते थे.
मनोज तिवार ने सचिन तेंदुलकर, एमएस धोनी, विराट कोहली, रोहित शर्मा और गौतम गंभीर जैसे दिग्गज क्रिकेटरों के साथ ड्रेसिंग रूम शेयर किया है. 2006-07 के रणजी ट्रॉफी सीजन में उन्होंने 99.50 के प्रभावशाली औसत के साथ 796 रन बनाए थे.
वह लंबे समय तक बंगाल के कप्तान रहे और उन्हें राज्य के शीर्ष क्रिकेटरों में से एक माना जाता था. तिवारी को मैचों के दौरान और अपने निजी जीवन में महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ा. एक समय पर भारतीय टीम के साथ लगातार अवसरों की कमी के कारण उन्होंने जल्दी संन्यास लेने पर विचार कर लिया था.
हाल में द लल्लनटॉप के साथ इंटरव्यू में तिवारी ने कहा, ” वह कठिन समय था. एक बात मेरे मन में हमेशा रहती थी कि मुझे कर्ज (Loan) चुकाना है. कोलकाता में हमारा मंगला हाट है और वहां मैं पूरी सब्जी बेचता था. मेरी मां पूरियां बनाती थीं. कभी-कभी लोग जो खाने के पैसे भी नहीं देते थे. ”
आशा भोसले की पोती को डेट कर रहे मोहम्मद सिराज? वायरल फोटो देख फैंस बोले- भाभी है क्या
पूर्व खिलाड़ी ने आगे कहा, ” मैंने नट और बोल्ट की फैक्ट्री में काम किया.. ये तब की बात है जब मैं करीब 14 साल का था. जब मैं अंडर-16 खेलता था तो मुझे हर मैच के लिए 1200 रुपये मिलते थे. इसलिए मैंने गणित लगाया और सुनिश्चित किया कि मैं क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करूं ताकि हमेशा पैसे मिलते रहें. मैं फैक्ट्री से भाग गया. ये बहुत व्यस्तता वाला समय था. फैक्ट्री मालिक हमसे काम करवाता था.”
मनोज तिवारी ने भारत के लिए अपना पहला मैच में 2008 में खेला था. उन्होंने अपना पहला वनडे शतक 2011 में चेन्नई में वेस्टइंडीज के खिलाफ बनाया था, लेकिन उस मैच के बाद उन्हें कई महीनों के लिए बाहर कर दिया गया था. उस समय एमएस धोनी टीम के कप्तान थे.
उन्होंने कहा, ” वह (धोनी) कप्तान थे. टीम अपने कप्तान के प्लान के साथ चलती थी. राज्य की टीमों में चीजें अलग होती हैं, लेकिन टीम इंडिया में सब कुछ कप्तान पर निर्भर करता है. अगर आप देखें, कपिल देव के समय में वह ही टीम चलाते थे, सुनील गावस्कर के समय भी ऐसा ही था. अजहरुद्दीन और दादा (गांगुली) के टाइम भी ऐसा ही था.”
ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें Cricket Hindi की और अन्य ताजा-तरीन खबरें
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.