नई दिल्ली: पाकिस्तान को अगले महीने से आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 की मेजबानी करनी है. इसके लिए कई टीमों ने अपनी-अपनी टीम की घोषणा कर दी है जबकि कुछ टीमों के अभी अपनी टीम का ऐलान करना बाकी है. चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 की शुरुआत से पहले ही पाकिस्तान की फजीहत होने लगी है.
टूर्नामेंट का आयोजन 19 फरवरी से होना और आईसीसी ने इसके लिए मैचों का शेड्यूल भी जारी कर दिया है. लेकिन पाकिस्तान अपनी जिम्मेदारियों में पूरा करने में विफल दिख रहा है और ऐसे में उससे कहीं इस टूर्नामेंट की मेजबानी ना छिन जाए.
आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 का पहला मैच मेजबान पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के बीच कराची में खेला जाना है. टूर्नामेंट के शुरू होने में बेहद कम समय बचे हैं लेकिन अभी तक पाकिस्तान में स्टेडियम पूरी तरह से तैयार नहीं हो पाए हैं. कराची, लाहौर और रावलपिंडी अभी तक स्टेडियम तैयार नहीं हैं, जिससे आईसीसी नाराज है और इस टूर्नामेंट को शिफ्ट करने पर भी विचार किया जा रहा है.
मीडिया में जारी रिपोर्ट्स के मुताबिक, आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 के लिए पाकिस्तान अगर तय समय पर स्टेडियमों को तैयार नहीं कर पाता है तो फिर टूर्नामेंट को दुबई शिफ्ट करने पर विचार किया जा सकता है.
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रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि कराची में नेशनल स्टेडियम, लाहौर में गद्दाफी स्टेडियम और रावलपिंडी क्रिकेट स्टेडियम में निर्माण का काम अभी भी चल रहा है. 12 फरवरी तक तीनों स्थलों को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) को सौंपना है. स्टेडियम का काम, जो पिछले साल अगस्त में शुरू हुआ था, 31 दिसंबर तक पूरा होना था, लेकिन यह अभी तक पूरा नहीं हुआ है.
लाहौर और कराची में अधूरा है निर्माण कार्य
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, लाहौर और कराची में भारी निर्माण कार्य चल रहा है, इसमें बहुमंजिला बाड़े, ड्रेसिंग रूम और हॉस्पिटैलिटी बॉक्स होंगे, उनका निर्माण अभी भी अंतिम चरण में नहीं पहुंचा है, नए बाड़ों के अलावा, बाड़ लगाने का काम, फ्लडलाइट्स और सीटें लगाना बाकी है जो अभी अंतिम चरण से बहुत दूर है और सबसे बड़ी बाधा मौसम की होगी जो निर्माण और फिनिशिंग कार्य को गति देने में मुश्किल पैदा करेगी.
गद्दाफी स्टेडियम, जहां बड़े मुकाबले खेले जाने हैं, जिसमें एक सेमीफाइनल और संभवतः फाइनल (यदि भारत क्वालीफाई नहीं करता है) शामिल है, लेकिन यह वह स्थल है जो अभी भी मापदंडों से काफी दूर है, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के पास ओवरटाइम काम करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है, आईसीसी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जल्दबाजी में किया गया काम खिलाड़ियों की सुरक्षा से समझौता न करे.
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