यह वर्ल्ड कप है या मजाक- अंपायरिंग ने टूर्नामेंट का मजा किया किरकिरा

महिला वर्ल्ड कप में अंपायरिंग को लेकर तमाम उंगलियां उठ रही हैं.. कई ऐसे फैसले देखने को मिले हैं जिन्हें बाद में बदला गया. डीआरएस पर कई लोगों ने सवाल उठाए.

Published date india.com Published: October 17, 2025 11:30 PM IST
यह वर्ल्ड कप है या मजाक- अंपायरिंग ने टूर्नामेंट का मजा किया किरकिरा
एलिस पेरी- ऑस्ट्रेलिया

नई दिल्ली: महिला विश्व कप 2025 में अंपायरिंग के स्तर में लगातार गिरावट देखी जा रही है. विश्व कप की शुरुआत से लेकर शुक्रवार तक कई ऐसे फैसले दिए गए हैं, जिन्होंने विवाद को जन्म दिया है. सबसे ज्यादा गलतियां डिसीजन रिव्यू सिस्टम (डीआरएस) में दिखी हैं.

इंग्लैंड और बांग्लादेश के बीच हुए मैच में सबसे बड़ी गलती हिदर नाइट से जुड़ी एक फैसले पर हुई. हिदर नाइट का कैच 13 के स्कोर पर शोर्ना अख्तर ने लिया. यह नीचा कैच था. नाइट फील्ड से जा रही थीं, लेकिन टीवी अंपायर गायत्री वेणुगोपालन ने अनिश्चित सबूतों के आधार पर इसके विपरीत फैसला सुनाया. इससे पहले मैदान पर दिए एक कैच आउट के फैसले को तीसरे अंपायर ने पलट दिया था.

कोलंबो में भारत और पाकिस्तान के बीच मैच के दौरान मुनीबा अली के रन आउट से जुड़े निर्णय पर भी सवाल उठे थे. पाकिस्तान की सलामी बल्लेबाज मुनीबा को पहले टीवी अंपायर ने बड़ी स्क्रीन पर नॉट-आउट दिया था, लेकिन बाद में उस फैसले को आउट में बदल दिया गया. टीवी अंपायर केरिन क्लास्टे ने पहले नॉट-आउट एलबीडब्ल्यू देने से पहले पूरी उपलब्ध फुटेज नहीं देखी थी. आगे की फुटेज देखने के बाद अपना फैसला बदल दिया. इस प्रक्रिया से भ्रम की स्थिति पैदा हुई. फैसले के बाद मुनीबा और कप्तान फातिमा सना को चौथे अंपायर से और सफाई मांगनी पड़ी थी.

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच में भारत ने सुने लुस के खिलाफ नॉट-आउट एलबीडब्ल्यू के फैसले पर रिव्यू मांगा. तीसरे अंपायर, कैंडेस ला बोर्डे ने फैसला सुनाया कि अल्ट्रा एज पर एक म्यूमर ही पैड पर अंडर-एज का संकेत देने के लिए पर्याप्त था, जबकि साइड-ऑन रीप्ले में म्यूमर के समय गेंद और बल्ले के बीच उचित दूरी दिखाई दे रही थी. लुस नॉट आउट रहीं.

भारत और ऑस्ट्रेलिया मैच के दौरान एलिसा हीली के स्नेह राणा द्वारा पॉइंट पर लिए गए कैच पर पहले थर्ड अंपायर ने नॉट आउट का निर्णय दिया, फिर आउट करार दिया.

ऐसे कई और फैसले रहे हैं जिन्होंने महिला क्रिकेट के सबसे बड़े आयोजन में अंपायरिंग पर सवाल खड़े कर दिए हैं. विश्व कप के दौरान टीवी अंपायरिंग का काम करने वाले दस अंपायरों में से केवल तीन ने 20 से अधिक ऐसे मैचों में टीवी अंपायरिंग की है जिनमें डीआरएस उपलब्ध था. तीन अंपायर ऐसे हैं जो पहले कभी किसी ऐसे वनडे मैच में टीवी अंपायर नहीं रहे जिसमें डीआरएस का इस्तेमाल हुआ हो. अनुभव की कमी अंपायरिंग के स्तर को गिरा रही है. इससे विश्व कप मैचों के परिणाम भी प्रभावित हो रहे हैं.

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