विदर्भ ने रचा इतिहास! पहली बार मिला विजय हजारे ट्रॉफी का खिताब, सौराष्ट्र को 38 रनों से दी मात
Vijay Hazare Trophy: विदर्भ ने पहली बार विजय हजारे ट्रॉफी जीती. फाइनल में सौराष्ट्र को 38 रन से हराकर अथर्व तायडे के शतक और यश राठौड़ के अर्धशतक की मदद से इतिहास रच दिया.
विदर्भ क्रिकेट टीम ने इतिहास रचते हुए पहली बार विजय हजारे ट्रॉफी का खिताब अपने नाम किया. फाइनल मुकाबला रविवार को बेंगलुरु के बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में खेला गया, जिसमें विदर्भ ने सौराष्ट्र को 38 रन से हराया. यह मैच बेहद रोमांचक रहा और पहले बल्लेबाजी करने उतरी विदर्भ ने अपनी ताकतवर बल्लेबाजी की बदौलत 8 विकेट के नुकसान पर 317 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया. इस पारी में अथर्व तायडे का शतक और यश राठौड़ का अर्धशतक सबसे खास रहा. विदर्भ की टीम ने पूरे मैच में संतुलित प्रदर्शन करते हुए पहली बार खिताब जीतने का सपना साकार किया.
अथर्व तायडे और यश राठौड़ की दमदार बल्लेबाजी
विदर्भ की पारी की शुरुआत करने आए अथर्व तायडे ने 118 गेंदों पर 3 छक्के और 15 चौकों की मदद से 128 रन बनाए. उनकी शानदार पारी ने टीम को बड़े स्कोर तक पहुंचाया. उनके साथ यश राठौड़ ने 61 गेंदों में 2 छक्के और 2 चौकों की मदद से 54 रन बनाए. दोनों ने दूसरे विकेट के लिए 133 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की, जिसने विदर्भ को मजबूती दी. इसके अलावा, अमन मोखाड़े ने 33 और रविकुमार समर्थ ने 25 रन की छोटी लेकिन अहम पारी खेली. सौराष्ट्र की गेंदबाजी की तरफ से अंकुर पंवार ने सबसे अधिक 4 विकेट लिए जबकि चेतन सकारिया और चिराग जानी ने 2-2 विकेट झटके.
सौराष्ट्र की जवाबी पारी और मैच का रोमांच
जवाबी पारी में सौराष्ट्र को 318 रन का लक्ष्य मिला, लेकिन पूरी टीम 48.5 ओवर में 279 रन पर सिमट गई. टीम की ओर से प्रेरक मांकड़ ने 92 गेंदों में 88 और चिराग जानी ने 63 गेंदों में 64 रन बनाए, लेकिन अन्य बल्लेबाज अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाए. यही वजह रही कि टीम खिताब से चूक गई. इस तरह सौराष्ट्र तीसरी बार विजय हजारे ट्रॉफी जीतने का मौका गंवा बैठी, पहले यह टीम 2007-08 और 2022-23 में खिताब जीत चुकी है.
विदर्भ की गेंदबाजी का शानदार योगदान
विदर्भ की जीत में गेंदबाजों का योगदान भी बेहद अहम रहा. यश ठाकुर ने 9.5 ओवर में 50 रन देकर सर्वाधिक 4 विकेट लिए. इसके अलावा नचिकेत भूटे ने 3, दर्शन नालकंडे ने 2 और हर्ष दूबे ने 1 विकेट झटका. उनकी लगातार दबाव वाली गेंदबाजी ने सौराष्ट्र की पारी को नियंत्रित रखा और टीम को खिताब जीतने में मदद की. कुल मिलाकर विदर्भ की संतुलित टीम प्रदर्शन, धैर्य और जोश ने उन्हें पहली बार विजय हजारे ट्रॉफी की ट्रॉफी दिलाई. यह जीत टीम और प्रशंसकों दोनों के लिए यादगार बन गई.
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