
Shivendra Rai
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले शिवेन्द्र राय को हिंदी डिजिटल पत्रकारिता में 5 साल का अनुभव है. वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से इतिहास में एमए ... और पढ़ें
Amravati sex abuse and blackmail case: महाराष्ट्र के अमरावती जिले में सामने आए नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण मामले में जांच के दौरान पुलिस को कुछ चौंकाने वाली बातें पता चलीं हैं. इस मामले के मास्टरमाइंड अयान अहमद ने कथित तौर पर जांच अधिकारियों से कहा कि अपने पहले ब्रेकअप के बाद वह ‘प्लेब्वॉय बन गया’ था.
इस हैरान कर देने वाले मामले को लेकर टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि अयान का मोबाइल फोन का अच्छा-खासा बिजनेस था. केस की जांच कर रहे सीनियर पुलिस अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि आरोपी अयान अहमद इंस्टाग्राम पर पेड प्रमोशन के जरिए भी ठीक-ठाक पैसे कमाता था. इंस्टाग्राम पर उसके 18,000 फॉलोअर्स थे.
आरोपी अयान अहमद ने सोशल मीडिया पर अपनी फेक इमेज बना रखी थी. वह दोस्तों और परिवारवालों से पैसे उधार लेता था. वह इन पैसों का इस्तेमाल अपनी अय्याश लाइफस्टाइल को मेंटेन रखने के लिए करता था. वह लड़कियों पर पैसे उड़ाता था और सोशल इमेज एक अमीर युवा की बना रखी थी. पुलिस ने बताया कि सोशल मीडिया पर उसकी दिखावटी इमेज ने महिलाओं को फंसाने में अहम भूमिका निभाई.
अयान लड़कियों से ऑनलाइन जुड़ता था और धीरे-धीरे चार से पांच महीनों में उनका भरोसा जीत लेता था. जब जान-पहचान का एक लेवल बन जाता था, तो वह कथित तौर पर उनसे सेक्शुअल फेवर मांगता था. कई बार वह तिकड़म लगाकर लड़कियों को ऐसी गतिविधियों में शामिल होने के लिए मजबूर करता था. जांच में ये भी सामने आया है कि वह AIMIM की अमरावती यूनिट का सोशल मीडिया हैंडल भी संभालता था. बाद में उसे निकाल दिया गया.
अयान अहमद ने 180 नाबालिग लड़कियों को अपने जाल में फंसाया था. उसने 350 से ज्यादा आपत्तिजनक वीडियो रिकॉर्ड किए थे. आरोपी रतवाड़ा शहर का रहने वाला है. शुरुआती जांच में सामने आया है कि वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए नाबालिग लड़कियों को अपने जाल में फंसाता था. वह पहले उनसे दोस्ती करता और फिर धीरे-धीरे उन्हें लव ट्रैप में डालकर अपने साथ मुंबई और पुणे जैसे बड़े शहरों में ले जाता था.
पुलिस के मुताबिक, इन शहरों में ले जाकर वह कथित तौर पर लड़कियों का शोषण करता और उनके आपत्तिजनक वीडियो रिकॉर्ड करता था. जांच में यह भी पता चला है कि इन वीडियो का इस्तेमाल बाद में पीड़ितों को ब्लैकमेल करने के लिए किया जाता था और उन्हें जबरन गलत कामों में धकेला जाता था. कुछ वीडियो के ऑनलाइन प्रसारित होने की भी आशंका जताई जा रही है, जिसकी जांच साइबर सेल कर रही है.
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