दिल्ली में लगातार बढ़ता जा रहा है कोरोना वायरस, वैज्ञानिकों ने बताई इसकी ये बड़ी वजह, आप भी जान लीजिए...

दिल्ली में अप्रैल महीने की शुरुआत से कोरोना वायरस का संक्रमण एक बार फिर फैलता जा रहा है. इसके पीछे क्या वजह है, स्वीडेन के वैज्ञानिकों के इस रिपोर्ट से पता चलता है. जानिए क्या है वो बड़ी वजह... आप भी जान लीजिए.

Published date india.com Published: April 27, 2022 8:25 AM IST
delhi coronavirus
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Delhi CoronaVirus: दिल्ली में फिर से  कोरोना के मामले बढ़ने लगे हैं. कोरोना वायरस के मामले के बढ़ने के पीछे क्या कारण हो सकता है, इसका पता लगाया जा रहा है, जिसमें पता चला है कि इसका कारण  दिल्ली में एकदम से बढ़ा प्रदूषण स्तर भी हो सकता है,  बता दें कि दिल्ली में अप्रैल का औसतन प्रदूषण मार्च से 19% ज्यादा, फरवरी से 11% ज्यादा है. स्वीडन के वैज्ञानिकों की 20 अप्रैल को प्रदूषण और कोरोना के लिंक पर छपी स्टडी के मुताबिक प्रदूषण स्तर बढ़ने पर भी कोरोना के मामले बढ़ते हैं. पढ़ें जी न्यूज संवाददाता शिवांक मिश्रा
की ये रिपोर्ट

दिल्ली में अप्रैल महीने की शुरुआत से ही कोरोना संक्रमण की रफ्तार फिर से तेज हो गई है. बीते 4 अप्रैल को दिल्ली में 38 दिनों के बाद कोरोना की रोजाना संक्रमण दर ने 1 प्रतिशत को पार किया था. वहीं दिल्ली में बीते 1 हफ्ते यानी 20 अप्रैल से रोजाना कोरोना के 1 हज़ार से ज्यादा मामले आ रहे हैं.  68 दिनों बाद शुरू हुआ ये सिलसिला जारी है. 20 अप्रैल से पहले दिल्ली में आखिरी बार 1 दिन में 1 हज़ार से ज्यादा कोरोना के मामले 10 फरवरी को आये थे.

राजधानी दिल्ली में एकदम से इस तरह बढ़े कोरोना के मामलों पर विशेषज्ञों द्वारा अंदेशा जताया जा रहा है कि कहीं दिल्ली में कोरोना के मामलों बढ़ने के पीछे दिल्ली में एकदम से प्रदूषण का बढना तो नहीं है. स्वीडन की कैरोलिंस्का यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने खराब प्रदूषण स्तर और इसकी वजह से कोरोना के मामलों के बढ़ने पर मई 2020 से मार्च 2021 तक स्वीडन के 4 हज़ार से ज्यादा लोगों पर एक स्टडी की थी.

इसी स्टडी के नतीजे 20 अप्रैल को साइंटिफिक जर्नल JAMA Network Open में छपे थे. वैज्ञानिकों ने अपनी स्टडी में पाया कि मई 2020 से मार्च 2021 के बीच मे इन 4 हज़ार लोगों में से 425 लोग कोविड से संक्रमित हो गए थे.  जब वैज्ञानिकों ने कोविड से संक्रमित होने वालों  पर और स्टडी की तो पता चला यह सभी लोग जिस शहर में रहते वहां प्रदूषण का स्तर कोविड से नहीं संक्रमित होने वाले लोगों के शहर के खासा ज्यादा था.

वैज्ञानिकों के मुताबिक जो लोग कोरोना से संक्रमित हुए थे उनके शहर का औसतन प्रदूषण स्तर PM2.5 में 4.4 micro gram per metre cube था जबकि जिन्हें नहीं हुआ था उनके शहर का औसतन प्रदूषण स्तर PM2.5 में 3.8 micro gram per metre cube था. स्टडी में शामिल वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में बताया कि प्रदूषण एक CARRIER या आसान शब्दो मे कहें तो POSTMAN की तरह काम करता है. वो कोरोनावायरस को 6 फ़ीट से भी ज्यादा दूरी पर किसी व्यक्ति के शरीर मे आसानी से पहुंचाने में मदद करता है. ऐसे में अगर प्रदूषण स्तर ज्यादा होगा तो ज्यादा लोगो के कोरोना से संक्रमित होने की सम्भावना रहेगी.

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