नई दिल्ली. दिल्ली हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव को नोटिस जारी करने के मामले में दिल्ली विधानसभा की प्रश्न और संदर्भ समिति से जवाब-तलब किया है. हाई कोर्ट ने समिति को मुख्य सचिव को उसके सामने पेश होने पर दबाव नहीं डालने का निर्देश दिया है. हाई कोर्ट ने कहा कि शीर्ष नौकरशाह को नोटिस जारी करने का समिति का कदम कानून की प्रक्रिया को धता बताने का प्रयास लगता है. हाई कोर्ट ने कहा कि मुख्य सचिव को नोटिस जारी करने ऐसी क्या जरूरत थी. मुख्य सचिव पर उपस्थित होने के लिए जोर न डाला जाए. Also Read - झारखंड के पूर्व सीएम मधु कोड़ा नहीं लड़ पाएंगे चुनाव, High Court ने खारिज की याचिका

हाई कोर्ट ने कहा कि दिल्ली विधानसभा की प्रश्न और संदर्भ समिति ने पांच मार्च को अदालत में कहा था कि अगले आदेश तक मुख्य सचिव से जुड़े मामले में आगे नहीं बढ़ेगी. इसके बाद भी उसने मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया. समिति के इस कदम पर सवाल खड़ा होता है. न्यायमूर्ति शकधर ने समिति के वकील से कहा कि पांच मार्च को बयान देने के तत्काल बाद शिकायतकर्ता (प्रश्न एवं सदंर्भ समिति) ने मुख्य सचिव को उसके समक्ष पेश होने का निर्देश देते हुए उन्हें नोटिस जारी किया. आखिर इस नोटिस को जारी करने की क्या जरूरत थी. न्यायमूर्ति ने समिति के वकील से कहा कि अपने मुवक्किल (समिति) से कहें कि वह ऐसा न करें. Also Read - कोरोना से बचने के लिए AC की जगह पंखे लगाने पर विचार कर रही है ये कोर्ट, बनाई गई समिति

हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे समिति कानून की प्रक्रिया को धता बताने का प्रयास कर रहा है. समिति हाई कोर्ट में लंबित मुख्य याचिका का इंतजार करे. अदालत ने समिति से नोटिस वापस लेने के लिये भी कहा. इस नोटिस में मुख्य सचिव से समिति के पास पेश होने का कहा गया था. बता दें कि मुख्य सचिव कल हाई कोर्ट पहुंचे थे क्योंकि उन्हें दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने उनके विरुद्ध दर्ज एक शिकायत को लेकर पेश होने का निर्देश देते हुए उन्हें नोटिस जारी किया था. Also Read - Covid-19: दिल्ली हाईकोर्ट ने तय की रैपिड टेस्ट किट की कीमत, मात्र 400 में मिलेगी सेवा

वकील ने कहा, नोटिस वापस नहीं ले सकती समिति

वहीं, समिति की ओर से पेश वकील मनीष वशिष्ठ ने इस मामले मे कहा कि समिति नोटिस वापस नहीं ले सकती क्योंकि दो अन्य अधिकारियों को भी यह नोटिस जारी किया गया है. उन्होंने आश्वासन दिया कि समिति मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए नहीं कहेगी. उनके कार्यालय का कोई अन्य कर्मचारी उस बैठक में जरूरी दस्तावेज लेकर पहुंच सकता है.