नई दिल्ली: केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा ( Sanyukt Kisan Morcha) ने कहा कि असम और ओडिशा के किसान यहां जंतर मंतर पर ‘किसान संसद’ में शामिल हुए. एसकेएम ने कहा कि आंध्र प्रदेश किसान एसोसिएशन समन्वय समिति और तमिलनाडु से ऑल इंडिया किसान सभा के सदस्यों के भी आगामी दिनों में उनके साथ जुड़ने की उम्मीद है. जिस समय देश की संसद का मॉनसून सत्र चल रहा है, उस समय आंदोलनरत संगठनों द्वारा ‘किसान संसद’ का आयोजन किया जा रहा है.Also Read - किसानों और सरकारों के बीच हमेशा संवाद होना चाहिए, उनकी समस्याओं को राजनीति से न जोड़ा जाए: उपराष्ट्रपति

एसकेएम ने एक बयान में कहा, ‘‘किसान संसद में शामिल होने के लिए देशभर से किसान आ रहे हैं. ओडिशा के प्रतिनिधिमंडलों की तरह आज असम की कृषक मुक्ति संघर्ष समिति के किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल शामिल हुआ.’’ Also Read - आंदोलन में जान गंवाने वाले 150 किसानों के परिजनों को नौकरी न दे पाने से दुखी हूं: अमरिंदर सिंह

संसद के आठवें दिन, किसानों ने पिछले साल पेश किए गए बिजली संशोधन विधेयक पर अपना विचार-विमर्श जारी रखा. एसकेएम ने कहा, ‘‘केंद्र सरकार ने विरोध कर रहे किसानों को औपचारिक वार्ता के दौरान आश्वासन दिया था कि वह बिजली संशोधन विधेयक को वापस ले लेगी. इसके बावजूद विधेयक को संसद के मॉनसून सत्र में पेश करने के लिए सूचीबद्ध किया गया है.’’ Also Read - इस राज्य में टीके की पहली खुराक ले चुके लोग दूसरी खुराक लेने के लिए नहीं आ रहे, अधिकारी परेशान

एसकेएम ने कहा, ‘‘किसान संसद ने केंद्र सरकार द्वारा किसानों को बिजली संशोधन विधेयक पेश नहीं करने के अपने स्पष्ट वादे से पलटने पर निराशा व्यक्त की और मांग की कि इसे तुरंत वापस लिया जाए. एसकेएम ने विधेयक को ‘‘किसान विरोधी’’ और ‘कॉर्पोरेट हितैषी’’ बताया. किसान पिछले साल नवंबर से ही दिल्ली के सिंघू, टीकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं. ‘किसान संसद’ के लिए हर दिन 200 किसान जंतर मंतर पर इकट्ठा होते हैं.