Coronavirus in Delhi हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार को ऑक्सीजन संकट के मुद्दे पर खरी-खरी सुनाई है. कोर्ट ने कहा कि अगर अस्पतालों में इलाज नहीं मिला तो लोग घरों में ही मरने लगेंगे. इस दौरान उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार से ऑक्सीजन आपूर्तिकर्ताओं, सिलेंडर भरने वालों और अस्पतालों के साथ बैठक कर वितरण योजना तैयार करने को कहा.Also Read - सूरतगढ़ में है तीन सौ साल पुराना जाल वाला बाबा रामदेव जी का मंदिर, तस्वीरों में देखिए भव्यता

दरअसल दिल्ली में ऑक्सिजन की सप्लाई को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई जारी रही. हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह सारे ऑक्सिजन सप्लायर और रीफिलर्स के साथ आज शाम को 5 बजे मीटिंग करे और इसमें क्या तय हुआ, इसके बारे में अदालत को कल तक रिपोर्ट दे. जस्टिस विपिन सांघी ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि ये हालत रही तो लोग घरों में ही मरने लगेंगे. Also Read - पंजाब में सियासत गरमाई: कैप्टन अमरिंदर जल्द बताएंगे सीएम मान को भ्रष्टाचार में लिप्त पूर्व मंत्रियों के नाम

वहीं जयपुर गोल्डन और INOX ने ऑक्सिजन को लेकर दिल्ली सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. हाई कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि राजस्थान पुलिस द्वारा ऑक्सीजन के चार टैंकर रोकना मानव जीवन को खतरे में डालने के समान है. Also Read - मिसाइल पोत ‘आईएनएस गोमती’ की नौसेना से विदाई, 34 साल बाद सेवामुक्त किया गया

कोर्ट ने राजस्थान सरकार को हिदायत भी दी है. कोर्ट ने कहा, “हमें आशा है कि राजस्थान सरकार दूसरे राज्यों में चिकित्सकीय ऑक्सीजन ले जा रहे टैंकरों को नहीं रोकने के आदेश का सम्मान करेगी.” कोर्ट ने कहा कि चिकित्सकीय ऑक्सीजन मुहैया कराने में किसी भी तरह का अवरोध सैकड़ों जिंदगियां को खतरे में डालने के समान होगा, कोई मकसद पूरा नहीं हो पाएगा. उच्च न्यायालय ने दिल्ली में ऑक्सीजन सिलेंडर विक्रेताओं को गैर उपलब्धता और कालाबाजारी की शिकायत पर मंगलवार को सुनवाई में उपस्थित रहने के लिए कहा.

वहीं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाई कोर्ट में कहा कि अगर दिल्ली को 380 एमटी ऑक्सीजन भी मिलती है तो काम चल सकता है, लेकिन इसके लिए जरूरी है सिस्टम का होना. उन्होंने कहा, “हमने दिल्ली सरकार के चीफ सेक्रेटरी से इस मुद्दे पर बात की है.”