नई दिल्ली : वरिष्ठ अधिवक्ता इंदु मल्होत्रा ने आज उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश पद की शपथ ग्रहण की इसी के साथ वह न्यायापालिका के शीर्ष पद पर सीधे पहुंचने वाली पहली महिला अधिवक्ता बन गईं हैं. 100 अधिवक्ताओं के समूह ने मल्होत्रा की नियुक्ति के राष्ट्रपति वारंट पर रोक की मांग की थी जिसे चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने ख़ारिज कर दिया था. Also Read - सुन्नी वक्फ बोर्ड अब तक जता रही है अयोध्या फैसले पर नाराजगी, कहा- 5 जजों का फैसला आखिरी नहीं

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने इंदु मल्होत्रा को शुक्रवार को शपथ दिलाई. शपथ ग्रहण के साथ ही उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या अब 25 हो गई है. उच्चतम न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश समेत 31 न्यायाधीशों की संख्या स्वीकृत है. इंदु ने उच्चतम न्यायालय के अदालत संख्या -1 में आयोजित समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ ली. Also Read - सुप्रीम कोर्ट ने न्यायालयों में रिक्त पड़े पदों पर लिया संज्ञान, निचली अदालतों से मांगी रिपोर्ट

केंद्र द्वारा जस्टिस जोसेफ की प्रोन्नति की फ़ाइल लौटने से हुआ विवाद
इंदु मल्होत्रा के ऐतिहासिक शपथ ग्रहण के एक दिन पूर्व शीर्षस्थ अदालत के कोलेजियम को जस्टिस के एम जोसेफ़ की प्रोन्नति सम्बन्धी अनुशंसा पुनर्विचार के लिए लौटाने के चलते विवाद हो गया. अभूतपूर्व पहल के तहत 100 वकीलों के समूह ने सरकार पर मनमर्जी का आरोप लगाते हुए भारी विरोध किया और बतौर न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा की नियुक्ति के लिए राष्ट्रपति के अधिपत्र पर रोक लगाने की मांग की हालांकि इस मांग को सीजेआई दीपक मिश्रा ने अस्वीकार कर दिया. साथ ही बार के 100 सदस्यों द्वारा उठाए गए इस कदम पर हैरानी जताते हुए इस मांग को निरर्थक और कल्पना से परे बता कर ख़ारिज कर दिया. Also Read - सुप्रीम कोर्ट ने कहा- तीन फुट कम किया जाए मुल्लापेरियार बांध का जलस्तर