PM Security Breach: रिटायर्ड जस्टिस इंदू मल्होत्रा करेंगी पीएम की सुरक्षा में हुई चूक की जांच, SC ने बनाया कमिटी का अध्यक्ष

PM Narendra Modi Security Breach: सुप्रीम कोर्ट ने पीएम की सुरक्षा में हुई चूक की जांच के लिए एक कमिटी का गठन किया है, जिसका अध्यक्ष रिटायर्ड जज जस्टिस इंदु मल्होत्रा को नियुक्त किया गया है.

Updated: January 12, 2022 12:02 PM IST

By India.com Hindi News Desk | Edited by Ikramuddin Saifi

PM Security Breach

PM Narendra Modi Security Breach: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने आज बुधवार को पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की सुरक्षा में चूक के मामले में अहम निर्देश दिया. कोर्ट ने सुरक्षा में हुई चूक की जांच के लिए एक कमिटी का गठन किया है, जिसका अध्यक्ष रिटायर्ड जज जस्टिस इंदु मल्होत्रा (Retired judge Justice Indu Malhotra) को नियुक्त किया गया है. कोर्ट ने जांच पैनल में रिटायर्ड जस्टिस के अलावा एनआईए के डीजी, चंडीगढ़ के डीजीपी, पंजाब के अतिरिक्त डीजीपी और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के महापंजीयक को जांच समिति के सदस्यों के रूप में नियुक्त किया है.

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सुरक्षा में हुई चूक की जांच करेगी कमिटी

चीफ जस्टिस एनवी रमना और जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि पैनल सुरक्षा उल्लंघन के कारणों, उल्लंघन के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों और भविष्य में प्रधानमंत्री के सुरक्षा उल्लंघन को रोकने के लिए किए जाने वाले उपायों की जांच करेगा. पैनल के अन्य सदस्यों में एनआईए के डायरेक्टर जनरल, डायरेक्टर जनरल ऑफ पंजाब सिक्योरिटी और पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के साथ ही अन्य सदस्य होंगे. पैनल गठित करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह स्वतंत्र समिति सुरक्षा में चूक के कारण, इसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों और भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए कदमों के बारे में जानकारी जुटाएगी.

पीठ ने जोर देकर कहा कि इस तरह के सवालों को एकतरफा पूछताछ के लिए खुला नहीं छोड़ा जा सकता है. राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों ने मामले की जांच के लिए अपनी-अपनी समितियां बनाई थीं. शीर्ष अदालत ने केंद्र और पंजाब सरकार दोनों से इस मामले में अपनी-अपनी जांच आगे नहीं बढ़ाने को कहा था. इससे पहले सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा था, ‘हम प्रधानमंत्री के सुरक्षा उल्लंघन को बहुत गंभीरता से ले रहे हैं.’ इसमें कहा गया है कि वह समिति से कम समय में अपनी रिपोर्ट उसे सौंपने को कहेगी.

लॉयर्स वॉयस की याचिका पर दिया आदेश

शीर्ष अदालत का आदेश एनजीओ लॉयर्स वॉयस की याचिका पर आया, जिसका प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने किया. याचिकाकर्ता ने देश के पीएम को सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया था और पिछले शीर्ष अदालत के फैसले का हवाला दिया था जो एसपीजी अधिनियम को देखता था. पंजाब सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे एडवोकेट जनरल डीएस पटवालिया ने इसके मुख्य सचिव और डीजीपी को कारण बताओ नोटिस के खिलाफ शिकायत की. उन्होंने शीर्ष अदालत से मामले की जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित करने का अनुरोध किया. पटवालिया ने कहा, ‘अगर मैं दोषी हूं तो मुझे फांसी दे दो.. लेकिन मेरी अनसुनी निंदा मत करो.’ (एजेंसी इनपुट्स)

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Published Date: January 12, 2022 11:43 AM IST

Updated Date: January 12, 2022 12:02 PM IST