सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बुधवार (28 अप्रैल, 2021) को यूपी सरकार (UP Government) को निर्देश दिया कि पत्रकार सिद्दीक कप्पन (Journalist Siddique Kappan) को इलाज के लिए एम्स (AIIMS) या दिल्ली के किसी दूसरे सरकारी हॉस्पिटल में शिफ्ट किया जाए. डायबिटीज और दिल की बीमारी से जूझ रहे कप्पन मथुरा जेल में कोरोना वायरस की चपेट में आ गए. वर्तमान में मथुरा मेडिकल कॉलेज में उनका इलाज चल रहा है. चीफ जस्टिस एनवी रमन की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की. पीठ ने कहा कि बीमारी से ठीक होने के बाद कप्पन को दोबारा मथुरा जेल भेज दिया जाएगा.Also Read - सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस लोकुर बोले- UAPA के प्रावधान तो राजद्रोह से भी ज्यादा खतरनाक, दुरुपयोग पर जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट (KUWJ) की याचिका पर सुनवाई के दौरान ये फैसला दिया. याचिका में कहा गया था कि कप्पन मथुरा जेल के बाथरूम में गिर गए थे. बाद में उन्हें कोविड-19 की पुष्टि हुई. यूनियन ने कप्पन के इलाज के लिए उन्हें AIIMS में भर्ती कराने की मांग की थी. Also Read - अलगाववादी नेता यासीन मलिक ने कबूले अपने गुनाह, हो सकती है उम्रकैद तक की सजा

इधर सुनवाई के दौरान यूपी सरकार ने इलाज के लिए कप्पन को राज्य से बाहर भेजने का विरोध किया. इसने कहा कि राज्य के हॉस्पिटलों में अन्य कैदियों का भी इलाज किया जा रहा है. इससे पहले कप्पन की पत्नी ने चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर हॉस्पिटल में कप्पन के स्वास्थ्य के संबंध में चिंता जताई थी. Also Read - यासीन मलिक ने Terror Funding केस में सभी आरोप स्वीकार किए, बिट्टा कराटे समेत कई पर आरोप तय

पत्र में कहा गया कि कप्पन को हॉस्पिटल जानवरों की तरह जंजीरों से एक खाट पर बांधकर रखा गया है. वो चार दिनों से ना खाना खा पा रहा है, ना चल-फिर पा रहा है और नाही बाथरूम जा पा रहा है. उसकी हालत बिगड़ रही है.

केरल के सीएम पिनराई विजयन ने भी इस संबंध में यूपी के सीएम योगी आदित्य नाथ को पत्र लिखा था. इसमें उन्होंने मामले में दखल देने और कप्पन को एक्सपर्ट्स द्वारा स्वास्थ्य देखभाल की अपील की गई.

उल्लेखनीय है कि कप्पन को यूपी पुलिस ने पांच अक्टूबर, 2020 को मथुरा से गिरफ्तार किया था. बताया जाता है कि वो हाथरथ गैंगरेप केस को कवर करने के लिए पहुंचे थे. हालांकि पुलिस का दावा है कि वो इस घटना की आड़ धार्मिक हिंसा को बढ़ावा देने की एक कथित साजिश का हिस्सा थे. वर्तमान में वो यूएपीए के तहत पुलिस हिरासत में हैं.