
Satyam Kumar
सत्यम, बिहार से हैं. उन्होंने LS College, मुजफ्फरपुर, बिहार से जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. जामिया मिल्लिया इस्लामिया से MA In Media Governance में मास्टर्स किया है. मास्टर्स के साथ ... और पढ़ें
भारत में हर साल लाखों युवा भारतीय वायु सेना (IAF) में शामिल होकर देश की सेवा करने और आसमान में विमान उड़ाने का सपना देखते हैं. लेकिन इसकी चयन प्रक्रिया और ट्रेनिंग इतनी कठिन है कि बहुत कम लोग ही अपना सपना पूरा कर पाते हैं. मुंबई के भव्य शाह की कहानी उन सभी बाधाओं को पार करने की एक जीती-जागती मिसाल है. जो हाथ कभी मैकडॉनल्ड्स के काउंटर पर बर्गर और फ्राइज सर्व करते थे, आज वही हाथ फाइटर प्लेन के कंट्रोल संभाल रहे हैं.
मुंबई के रहने वाले भव्य शाह ने हाल ही में भारतीय वायु सेना में अधिकारी बनकर इतिहास रचा है. उनका सफर किसी फिल्मी पटकथा जैसा लगता है. भव्य ने न केवल वायु सेना की कठिन परीक्षा पास की, बल्कि अपनी ट्रेनिंग के दौरान भी बेहतरीन प्रदर्शन भी किया. महज तीन महीने की कड़ी ट्रेनिंग के भीतर ही उन्होंने मेरिट लिस्ट में शीर्ष उम्मीदवारों में अपना स्थान सुरक्षित कर लिया और अंतत नीली वर्दी पहनकर पायलट बनने का अपना बचपन का सपना पूरा किया.
भव्य शाह ने अपने खर्चों और सपनों को पूरा करने के लिए उन्होंने कभी किसी काम को छोटा नहीं समझा. उन्होंने मुंबई में मैकडॉनल्ड्स (McDonald’s) के एक काउंटर पर काम करना शुरू किया. वहां वे ग्राहकों के ऑर्डर लेते थे और फास्ट-फूड सर्व करते थे. दिन भर काउंटर पर खड़े रहकर भागदौड़ करने के बाद भी वे अपनी पढ़ाई और फिटनेस के प्रति सजग रहते थे. यही वह समय था जब उन्होंने अनुशासन और समय प्रबंधन (Time Management) के असली गुण सीखे.
भव्य शाह का बचपन स्थिरता से दूर, बदलावों के बीच बीता. उनके पिता की नौकरी ट्रांसफर वाली थी, जिसके कारण उन्हें बार-बार अपना घर और शहर बदलना पड़ता था. कभी वे मुंबई की आपाधापी वाली जिंदगी में रहे, तो कभी शांत छोटे कस्बों में. बचपन के इसी उतार-चढ़ाव ने भव्य के भीतर लचीलापन (Resilience) और अनुकूलनशीलता पैदा की. बार-बार नए माहौल में ढलने की इस मानसिक दृढ़ता ने उन्हें वायु सेना अकादमी की कठिन ट्रेनिंग में सबसे आगे रखा.
आज भव्य शाह उन हजारों रक्षा उम्मीदवारों (Defence Aspirants) के लिए रोल मॉडल बन चुके हैं, जो आर्थिक अभाव या कठिन चयन प्रक्रिया के कारण हार मान लेते हैं. भव्य शाह की कहानी बताती है कि आपकी आज की स्थिति यह तय नहीं करती कि आप कल कहां होंगे. एक फास्ट-फूड काउंटर से शुरू हुआ सफर वायु सेना के कॉकपिट तक पहुंच सकता है, बशर्ते आपके इरादे फौलादी हों.
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