UP RTE Admission 2026: यूपी में बदला निजी स्कूलों में दाखिले के नियम! अब बिना Aadhaar बच्चों को मिलेगा एडमिशन, जानें क्या हैं नये प्रावधान

यूपी सरकार ने RTE दाखिले के लिए बच्चों का आधार कार्ड अनिवार्य करने का नियम खत्म कर दिया है. अब माता-पिता के Aadhaar और आयु सीमा के नए मानकों के आधार पर ऑनलाइन लॉटरी से स्कूल आवंटित होंगे.

Published date india.com Published: January 11, 2026 12:54 PM IST
स्कूलों में एडमिशन के लिए नहीं लगेगा आधार
स्कूलों में एडमिशन के लिए नहीं लगेगा आधार

उत्तर प्रदेश के निजी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा (RTE) के तहत प्रवेश पाने के इच्छुक अभिभावकों के लिए राहत भरी खबर है. राज्य सरकार ने दाखिले की प्रक्रिया को सरल बनाते हुए बच्चों के आधार कार्ड की अनिवार्यता को पूरी तरह समाप्त कर दिया है. अब केवल माता या पिता के आधार कार्ड के जरिए ही आवेदन स्वीकार किए जाएंगे. इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा उन परिवारों को मिलेगा जिनके पास डॉक्यूमेंट्स की कमी के चलते बच्चों का एडमिशन नहीं हो पाता था. आइये जानते हैं पूरा मामला..

आधार कार्ड से जुड़े नए नियम

पहले के नियमों के अनुसार, ऑनलाइन आवेदन के समय बच्चे और माता-पिता दोनों का आधार अनिवार्य था. लेकिन नई गाइडलाइंस के मुताबिक, दाखिले के लिए बच्चे का आधार (Aadhaar) होना अब जरूरी नहीं है. वहीं, आधार की जानकारी अब केवल वित्तीय सहायता (Financial Assistance) के वितरण के लिए जरूरी होगी. इसके अलावे, सरकार द्वारा दी जाने वाली ड्रेस और किताबों की राशि सीधे माता-पिता के Aadhaar-seeded (आधार लिंक) बैंक खाते में भेजी जाएगी, इसलिए दाखिले के लिए आवेदन करते समय अभिभावक को अपना आधार-लिंक्ड बैंक खाते की जानकारी देना होगा.

आयु सीमा (Age Limit) के नए मानक

दाखिले के लिए एज लिमिट को लेकर भी स्थिति साफ कर दी गई है. अलग-अलग कक्षाओं के लिए आयु सीमा इस प्रकार है:

  • नर्सरी: 3 वर्ष से अधिक लेकिन 4 वर्ष से कम,
  • LKG: 4 वर्ष से अधिक लेकिन 5 वर्ष से कम,
  • UKG: 5 वर्ष से अधिक लेकिन 6 वर्ष से कम,
  • कक्षा 1:  6 वर्ष से 7 वर्ष के बीच,

दाखिले के लिए डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और स्कूल अलॉटमेंट

दाखिले की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और स्कूलों के आवंटन के कड़े नियम बनाए गए हैं. एडमिशन के लिए आवेदन के बाद डॉक्यूमेंट का वेरिफिकेशन ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) और बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) के लेवल पर किया जाएगा. स्कूलों का आवंटन मानवीय हस्तक्षेप के बिना एक ऑनलाइन लॉटरी सिस्टम के जरिए होगा. यह प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होगी. पहले चरण में सभी सत्यापित आवेदनों को डिजिटल रूप से रेंडमाइज करके लॉटरी नंबर दिया जाएगा. दूसरे चरण में, माता-पिता द्वारा चुने गए स्कूलों और लॉटरी नंबर के आधार पर 100-100 आवेदनों के बैच में स्कूल आवंटित किए जाएंगे. स्कूल आवंटन की अंतिम सूची को संबंधित जिले के जिलाधिकारी (DM) द्वारा अनुमोदित किया जाएगा.

सीटों का गणित

यूपी सरकार के नए नियमों के अनुसार, प्रत्येक जिले के गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूलों में एंट्री-लेवल क्लास (प्री-प्राइमरी या कक्षा 1) की कुल क्षमता की 25% सीटें आरक्षित होंगी. जिला स्तर पर हर साल इन सीटों का लक्ष्य निर्धारित किया जाएगा ताकि पात्र बच्चों को शिक्षा का हक मिल सके.

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