मुंबई: अभिनेता अली फजल को इस चुनौतीपूर्ण घड़ी के बीतने का इंतजार है क्योंकि उनका मानना है कि कोविड-19 के बाद समाज एक ऐसे बदलाव के दौर से गुजरेगा, जिसे हमने पहले कभी नहीं देखा होगा और यह वल्र्ड सिनेमा में कहानीकारों के लिए एक रोचकपूर्ण दौर होगा. Also Read - कोरोना वायरस से प्रभावित टॉप 10 देशों की सूची में पहुंचा भारत, जून के अंत तक बहुत तेजी से बढ़ेंगे मामले

अली ने बताया, “मेरे ख्याल से यह वह समय है, जब कई लेखक अपने घरों में बैठे हैं और उनके दिमाग में कई सारी कहानियां बन रही हैं, तो आगामी दो या तीन सालों में सिनेमा में हमें कई दिलचस्प कहानियां देखने को मिलेंगी. करीब से देखने पर हम पाएंगे कि पिछले साल दिसंबर से हमारे समाज में राजनीति व आर्थिक रूप से काफी कुछ हुआ है और अब यह वैश्विक महामारी. Also Read - पंजाब में कोविड-19 के 21 नए मामले सामने आये, कुल संख्या बढ़ कर 2,081 हुई

  Also Read - शादी के तुरंत बाद दूल्‍हा-दुल्‍हन सीधे पहुंचे अस्‍पताल, कोरोना टेस्‍ट कराने के बाद पहुंचे घर

View this post on Instagram

 

Maine bolna chhod diya, kaha thha uss din .. unhone humko hee kehdiya. Maine bolna chhod diya.. aawaaz nikli hee thhee ki shor ne kaarobaar jala diya. Maine bolna chhod diya – chee chihaa pet se nikli hee thheen, ki amma ne dum tod diya. Amma amma nahi rahi Maine maangna chhod diya. Ab upar ka kaarobaar chalega kaise .. maine tera naam bhi mitaa diya.. le dekh meri aukaat, le naap meri qismat.. tujhe darja bhi kya doon, mera darzi tujhse zyaada wafadaar hai. Yeh sab kyu? Hahah Tuney dena jo chhod diya – original by Tismaania Biswa

A post shared by ali fazal (@alifazal9) on

अली कहते हैं, “एक समाज के तौर पर हम बदलाव में से होकर गुजर रहे हैं और यह जारी रहेगा. चूंकि सिनेमा समाज का प्रतिबिंब है, तो आने वाले समय में यह भी काफी भिन्न होगा. हमारी फिल्मों में स्वर्णयुग पचास व साठ के दशक में आया था क्योंकि आजादी के बाद हमारा देश एक काफी बड़े परिवर्तन में से होकर गुजरा. कोविड-19 के बाद दुनिया में एक और परिवर्तन दिखाई देगा, तो मैं इस बदलाव के आने और इसे हम किस तरह से आत्मसात करते हैं, इसे देखने का इंतजार कर रहा हूं.”


अली आगे कहते हैं, “आपको पता ही है कि हम अपने इतिहास को कला – सिनेमा, साहित्य, फैशन, चित्रकारी इत्यादि के माध्यम से जानते हैं. ये कुछ ऐसे माध्यम हैं, जो समाज को प्रतिबिंबित करते हैं और समाज में जो कुछ भी होता आया है, हमें इनमें इसकी झलक मिलती है. किसी समाज के बारे में हम वहां व किसी विशेष दौर की फिल्मों को देखकर जान सकते हैं.”