Live Updates

Anuradha Paudwal birthday special: A look at the singer's journey in Bollywood and devotional songs

नई दिल्ली, 27 अक्टूबर: अनुराधा पौडवाल का नाम यूं तो किसी परिचय का मोहताज नहीं है, लेकिन संगीत जगत में उनकी विशेष पहचान भजनों और भक्ति गीतों के लिए है। हिन्दी सिने जगत की प्रमुख पाश्र्वगायिकाओं में से एक अनुराधा का बचपन मुंबई में बीता, जिस वजह से उनका रुझान शुरू से फिल्मों की तरफ रहा। उन्होंने अपने संगीत करियर की शुरुआत 1973 में फिल्म ‘अभिमान’ (अमिताभ बच्चन और जया भादुड़ी) से की, जिसमें उन्होंने जया के लिए एक श्लोक गीत गाया था। 

इसके बाद वर्ष 1976 में फिल्म ‘कालीचरण’ में भी उन्होंने गाना गाया, लेकिन एकल गाने की शुरुआत उन्होंने फिल्म ‘आप बीती’ से की। इस फिल्म का संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने दिया, जिनके साथ अनुराधा ने और भी कई मशहूर गाने गाए।

आज बॉलीवुड गानों की सीडी या पोस्टर में हमें भले सुनिधि चौहान या श्रेया घोषाल जैसी गायिकाएं देखने को मिलें, लेकिन कुछ साल पहले तक ऐसा नहीं था। गायिकाओं के नाम पर सिर्फ ‘स्वरकोकिला’ लता मंगेशकर और उनकी बहन आशा भोंसले थीं, लेकिन इस बीच एक ऐसी गायिका भी उभरी, जिन्होंने पाश्र्वगायिकी के मायने ही बदल दिए।

अनुराधा और (T-Series) का कनेक्शन:

अनुराधा ने शून्य से शुरू होकर सफलता का जो शिखर छुआ, वह अभूतपूर्व है। टी-सीरीज (T-Series) एवं सुपर कैसेट म्यूजिक कंपनी से 1987 में जुड़ने के बाद उन्होंने संगीत में सफलताओं के नये आयाम हासिल किए। फिल्म ‘सड़क’, ‘आशिकी’, ‘लाल दुपट्टा मलमल का’, ‘बहार आने तक’, ‘आई मिलन की रात’, ‘दिल है कि मानता नहीं’ जैसी फिल्मों के गीतों ने उन्हें रातोंरात लोकप्रियता की बुलंदी पर पहुंचा दिया। अनुराधा के पति अरुण पौडवाल भी एक अच्छे संगीतकार थे और उन्होंने ही अनुराधा को आगे बढ़ने का हौसला दिया।

27 अक्टूबर, 1954 को जन्मीं अनुराधा को ‘धक-धक करने लगा‘ (बेटा), ‘तू मेरा हीरो’ (हीरो), ‘हम तेरे बिन’ (सड़क), ‘मैया यशोदा’ (हम साथ साथ हैं), ‘जिस दिन तेरी मेरी बात’ (मुस्कान), ‘चाहा है तुझको’ (मन), ‘एक मुलाकात जरूरी है सनम’ (सिर्फ तुम) और ‘दो लफ्जो में’ (ढाई अक्षर प्रेम के) सरीखे लोकप्रिय गाने के लिए जाना जाता है।

पति की असमय मृत्यु की वजह से अनुराधा पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा।

लेकिन वह टी-सीरीज के साथ मिलकर एक-से-एक गीत देती रहीं। फिल्मों में अपने चरम पर पहुंचने पर उन्होंने सिर्फ टी-सीरीज कंपनी के लिए ही गाने का फैसला लिया। नतीजा यह हुआ कि टी-सीरीज कंपनी के उस समय के सभी भक्ति गानों और ऑडियो कैसेटों में अनुराधा की ही आवाज होने लगी। लेकिन इसका फायदा उनकी प्रतिद्वंदियों को हुआ, जिन्होंने उनकी अनुपस्थिति में फिल्मों में अधिक गाने गाना शुरू कर दिया, लेकिन आज भी अनुराधा की तरह भजन गाना सबके वश की बात नहीं है। माना जाता था कि अनुराधा एकमात्र ऐसी गायिका थीं, जो मंगेशकर बहनों को टक्कर देने का माद्दा रखती थीं।

लेकिन तमाम ऊंचाई और जिंदगी की गहराई देखने के बाद भी अनुराधा ने गायिकी से कभी मुंह नहीं मोड़ा। आज भी उनकी आवाज में भजनों को सुनकर मन को असीम शांति मिलती है।

– वंदना चौहान