Arjun Kapoor On His Depression: बॉलीवुड एक्टर अर्जुन कपूर इन दिनों अपनी हालिया रिलीज फिल्म सिंघम अगेन को लेकर चर्चा में बने हुई है और उनकी एक्टिंग की लोग जमकर तारीफ कर रहे हैं. विलेन के तौर पर उनके काम को जमकर सराहा जा रहा है. ऐसे में एक बार फिर से एक्टर को फैंस जमकर प्यार दे रहे हैं. वीहं उनकी खाते में भी सालों बाद बड़ी हिट फिल्म आई है. ऐसे में अनुपम चोपड़ा को दिए हालिया इंटरव्यू में अर्जुन कपूर ने फिल्में फ्लॉप और जिंदगी में जल रही चजों पर खुलकर बात की है.
‘मैंने थैरेपी लेनी शुरू कर दी थी’
अनुपम चोपड़ा को दिए हालिया इंटरव्यू में अर्जुन कपूर ने फिल्में फ्लॉप होने के बारे में बात की. उन्होंने कहा- ‘मैंने थैरेपी लेनी शुरू कर दी थी. डिप्रेशन और थेरेपी का सिलसिला पिछले साल से शुरू हुआ. मुझे नहीं पता था कि मैं उदास था या नहीं, मुझे पता था कि कुछ काम नहीं कर रहा था. मेरी जिंदगी फिल्मी हो गई थी और अब अचानक मुझे इसकी आदत हो गई है कि दूसरे लोगों का काम देखो और मन ही मन सोचो, कि क्या मैं कर पाऊंगा या मुझे मौका मिलेगा?’
क्या अकेलेपन से जूझ रहे हैं?
अर्जुन कपूर ने हाल ही एक इंटरव्यू में प्रोफेशनल लाइफ के साथ पर्सनल लाइफ को लेकर भी खुलकर बात की. जब इंटरव्यू में अर्जुन से पूछा गया कि क्या ब्रेकअप के बाद वह उसी अकेलेपन से जूझ रहे हैं, तो उन्होंने जवाब दिया, ‘मुझे लगता है कि वह 2014 था, और मैं अपनी मां को खोने से उबर रहा था और मेरी बहन दिल्ली में थी, इसलिए घर खाली था. अर्जुन ने कहा, ‘यह वह समय भी था जब मैं एक स्टार बन रहा था और मुझे सबका ध्यान मिल रहा था, लेकिन मरी पर्सनल लाइफ में उथल-पुथल चल रही थी. फिर, मेरी पर्सनल लाइफ बैलेंस हुई, भले ही काम कैसा भी हो.
माइल्ड डिप्रेशन से जूझे अर्जुन कपूर
सिंघम अगेन एक्टर ने आगे कहा- ‘मैं कभी भी कड़वा या नेगेटिव इंसान नहीं रहा, लेकिन ये मेरे अंदर बहुत बुरी तरह से पनपने लगा. मैंने थैरेपी शुरू की और कुछ थैरेपिस्ट के पास गया, जिनसे कोई फायदा नहीं हुआ. तो मैं फिर से कंफ्यूज हो गया. फिर मुझे कोई ऐसा शख्स मिला जिसने मुझे बोलने की परमिशन दी. उस समय उसने माइल्ड डिप्रेशन डाइग्नोज किया था. मैंने हमेशा इसके बारे में खुलकर बात नहीं की है, लेकिन मुझे हाशिमोटो बीमारी भी है, जो थायरॉयड का ही एक्स्टेंशन है.’
इस पर आगे बात करते हुए एक्टर ने कहा कि ‘मुझे लगता है कि आज, जैसा कि मैं यह कहता हूं, मुझे बस अपना ख्याल रखने की जरूरत थी’ स्वार्थी होने को थोड़ा गलत तरीके से देखा जाता है, लेकिन मुझे लगता है कि यह स्वार्थ नहीं है. यह सिर्फ इतना है कि मैं अन्य चीजों के कारण ठीक नहीं था, यह अकेलापन या मेरा अकेला होना नहीं था. यह सिर्फ मेरे जीवन में बहुत कुछ हुआ था.’
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