पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जितना एक राजनेता के रूप में सराहे जाते थे उतना ही उन्हें एक अच्छे इंसान और बेहतरीन कवि के रूप में भी लोगों का प्यार मिला. वाजपेयी जी ने जब भी अपनी बात रखी बिना किसी लाग-लपेट के बेबाकी से रखी. एक इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पूछा गया- कविताएं जब आप लिखते हैं तो कुछ एकाकीपन का भाव रहता है? अटल जी ने कहा- हां, मैं अकेला महसूस करता हूं. भीड़ में भी अकेला. फिर जब उनसे शादी के बारे में सवाल किया गया तो वे वाजपेयी ने कहा कि घटनाक्रम ऐसा चलता गया मैं उसमें उलझता गया और विवाह का मुहूर्त नहीं निकला. यही नहीं वाजपेयी से उनके अफेयर के बारे में पूछा गया- सवाल सुनकर वे हंस पड़े और कहा-अफेयरों की चर्चा ऐसे सार्वजनिक रूप से नहीं की जाती. इस इंटरव्यू में वाजपेयी ने अपने बारे में कई बातें बताई. उन्होंने बताया कि ‘उनका पैतिृक गांव उत्तरप्रदेश है वाजपेयी जी के पिताजी अंग्रेजी पढ़ने के लिए गांव छोड़कर आगरा चले गए थे. वे इटावा में पढ़े, आगरा में पढ़े, फिर उन्हें ग्वालियर में नौकरी मिल गई थी. मेरा जन्म ग्वालियर में हुआ. इसलिए वे यूपी के भी हैं और एमपी के भी.

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बता दें, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई का 16 अगस्त को निधन हो गया. गुरुवार की शाम दिल्ली के एम्स में उन्होंने आखिरी सांस ली. वाजपेई जी को हिंदी साहित्य, कविताएं और फिल्में देखना पसंद था. वे खाने के भी बेहद शौकीन थे. जब भी उन्हें खाली वक्त मिलता वे लिखते थे या फिर फिल्में देखते थे. अटलजी की सबसे पसंदीदा हिंदी फिल्मों में देवदास, बंदगी और तीसरी कसम शामिल थीं. अंग्रेजी में उनकी फेवरेट फिल्म थी द ब्रिज ऑन द रिवर कवाई. बॉर्न फ्री और गांधी भी उन्हें पसंद थीं.

खासकर वे बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री हेमा मालिनी के बहुत बड़े फैन थे. उन्हें हेमामालिनी की फिल्में देखना बेहद पसंद था. एक इंटरव्यू के दौरान खुद हेमा ने इस बात का खुलासा किया था. अटल जी को हेमा मालिनी की 1972 में आई फिल्म सीता और गीता इतनी पसंद आयी थी कि उन्होंने इस फिल्म को 25 बार देखा था. 1972 में आई हेमा मालिनी की फिल्म सीता और गीता में हेमा का डबल रोल था और फिल्म के निर्देशक रमेश सिप्पी थे.

सीता और गीता के अलावा अटल जी को वहीदा रहमान की फिल्म ‘तीसरी कसम’ भी काफी पसंद थी. फिल्म ‘तीसरी कसम’ फिल्म 1966 में आई थी. यह फिल्म प्रसिद्ध साहित्यकार फणीश्वर नाथ रेणु की चर्चित कहानी ‘मारे गए गुलफाम’ पर बनी थी. इस फिल्म में मुख्य भूमिका में राजकपूर और वहीदा रहमान नजर आए थे. यह फिल्म बासु भट्टाचार्य के निर्देशन में बनी थी. जिसके निर्माता सुप्रसिद्ध गीतकार शैलेन्द्र थे.

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‘तीसरी कसम’ फिल्म ने साल 1967 में ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’ में सर्वश्रेष्ठ हिंदी फीचर फिल्म का पुरस्कार भी जीता था. इस फिल्म में सब कुछ सादगी से दर्शाया गया था जो अटल जी को भा गई इसलिए यह फिल्म अटल जी को बेहद पसंद है.इसके अलावा देवदास और बंदिनी फिल्म भी उनकी पसंदीदा फिल्में है. फिल्मों के अलावा अटल जी अमिताभ और राखी पर फिल्माया गाना ‘कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है को अक्सर सुना करते थे.

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