भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का गुरूवार को दिल्ली के एम्स में निधन हो गया. वह एम्स में बुधवार से लाइफ स्पोर्ट सिस्टम पर थे. जगजीत सिंह ने 2002 में ‘संवेदना’ एल्बम में अटल जी की कविताओं को गाया था. संवेदना की प्रस्तावना जावेद अख्तर ने लिखी थी, आवाज अमिताभ बच्चन ने दी थी, अभिनय शाहरुख खान का था, निर्देशन यश चोपड़ा ने किया था. बोल थे-

क्या खोया,
क्या पाया जग में
मिलते और बिछुड़ते मग में
मुझे किसी से नहीं शिकायत
यद्यपि छला
गया पग-पग में
एक दृष्टि बीती पर डालें,
यादों की पोटली टटोलें!

पृथ्वी लाखों वर्ष पुरानी
जीवन एक अनन्त कहानी
पर तन की अपनी सीमाएँ
यद्यपि सौ
शरदों की वाणी
इतना काफ़ी है अंतिम
दस्तक पर, खुद दरवाज़ा खोलें!

जन्म-मरण अविरत फेरा
जीवन बंजारों का डेरा
आज यहाँ, कल कहाँ कूच है
कौन जानता
किधर सवेरा
अंधियारा आकाश असीमित,
प्राणों के पंखों को तौलें!
अपने ही मन से कुछ बोलें!

जहां ‘मैं और वो’ की दीवार हटती हैं वहीं से शुरू होती हैं अटल जी की कविताएं. फिर वे शब्द सिर्फ अटल जी के ही नहीं बल्कि हर संवेदनशील इंसान के शब्द बन जाते हैं. यूं तो उनकी कविताओं का मुरीद हर कोई है जिसमें खुद गज़ल सम्राट जगजीत सिंह भी एक थे. उन्होंने 2002 में ‘संवेदना’ एल्बम में अटल जी की कविताओं को गाया था. बता दें, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है.

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