पिछले 40 वर्षो से मनोरंजन और अभिनय जगत में सक्रिय 73 वर्षीय अभिनेत्री सुरेखा सीकरी (Surekha Sikri) अभी भी हथियार डालने को तैयार नहीं हैं. उन्हें फिल्म ‘बधाई हो’ में दकियानूसी दादी मां के किरदार में दर्शकों का काफी प्यार मिल रहा है. सुरेखा ने कहा, “रिटायरमेंट? मैं इस शब्द को जानती तक नहीं हूं. इसका क्या अर्थ होता है.”वह कहती हैं, “यह एक बहुत ही पुराना हो चुका अंग्रेजी का सिद्धांत है.. कि आप कुछ करते हैं और फिर रिटायर हो जाते हैं.. और यह ज्यादातर सरकारी नौकरों पर लागू होता है. सौभाग्य से मैं एक फ्रीलांसर हूं और रिटायर होने की मेरी कोई इच्छा नहीं है. मैं तो बस काम करते रहना चाहती हूं.”

सुरेखा सीकरी ने अपनी अभिनय यात्रा 1978 में आपातकाल के दौरान रिलीज हुई फिल्म ‘किस्सा कुर्सी का’ से शुरू की थी, जो राजनीति पर आधारित थी. उसके बाद उन्होंने फिल्मों, रंगमंच और टेलीविजन में काम कर नाम कमाया. उनके नाम ‘तमस’, ‘मम्मो’, ‘सरफरोश’, ‘जुबैदा’, ‘जो बोले सो निहाल’ और ‘हमको दीवाना कर गए’ जैसी सफल परियोजनाएं दर्ज हैं.

इसके अलावा टीवी के लिए सुरेखा को खासतौर से ‘बालिका वधू’ में दादीसा के किरदार के अलावा ‘सात फेरे-सलोनी का सफर’, ‘एक था राजा एक थी रानी’, ‘परदेस में है मेरा दिल’ और ‘जस्ट मोहब्बत’ में उनके बेहतरीन अभिनय के लिए जाना जाता है.

अभिनेत्रियों के लिए पुराने जमाने और आज के जमाने में क्या कुछ बदलाव आया है? सुरेखा कहती हैं, “आज ज्यादा खुलापन है. लोग किसी भी चीज को स्वीकारने और उस बारे में बात करने को तैयार हैं. पहले यदि हम बॉलीवुड के बारे में बातें करते थे तो सिर्फ अच्छी-अच्छी ही बातें करते थे, और तय फॉर्मूले पर चलते थे.”

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेत्री का कहना है कि कभी-कभी वह सोचती हैं कि यदि वह आज फिल्मोद्योग में प्रवेश करतीं तो चीजें कैसी होतीं?

उन्होंने कहा, “आज की चीजों को देखते हुए मैं अक्सर कहती हूं कि मुझे 40-50 साल बाद पैदा होना चाहिए था. लेकिन कोई नहीं, मेरे जैसे लोगों के लिए यहां कई सारी भूमिकाएं हैं.”‘बधाई हो’ के बाद सुरेखा के पास कई फिल्में हैं.उन्होंने कहा, “कतार में कई फिल्में हैं, लेकिन मैं फिलहाल उनके बारे में बात नहीं करूंगी.”

(इनपुट आईएनएस)

बॉलीवुड और मनोरंजन जगत की ताजा ख़बरें जानने के लिए जुड़े रहें  India.com के साथ.