एक निश्चित उम्र की महिलाओं में अंतरंगता और गर्भ धारण करने से परहेज करने की मानसिकता, जिसने फिल्म निर्देशक अमित शर्मा को ‘बधाई हो’ (Badhaai Ho) बनाने के लिए पर्याप्त कारण दिया. यह फिल्म दिल्ली के एक मध्यमवर्गीय परिवार के इर्द गिर्द घूमती है जिसमें बड़े हो रहे दो बच्चों की मां को अचानक उनके गर्भवती होने का पता चलता है. दर्शकों ने इस फिल्म को हाथों हाथ लिया है.शर्मा ने कहा, “ऐसी प्रतिक्रिया से मैं अचंभित हूं. मुझे हर तरफ से फोन आ रहे हैं. ‘बधाई हो’ देखते हुए एक मित्र ने लंदन से फोन कर कहा कि उसे लग रहा है कि वह ये फिल्म लखनऊ में देख रहा है. दर्शकों की प्रतिक्रिया काफी शानदार है, इससे ऐसा महसूस हो रहा है जैसे पूरे भारत ने फिल्म को स्वीकार कर लिया है.”

देर से गर्भ धारण करने के मुद्दे पर बहस शुरू हो गई है. शर्मा ने तुरंत सफाई दी, “ऐसा नहीं है कि मैं लोगों को 50 की आयु के बाद बच्चा करने की सलाह दे रहा हूं. देश में पहले ही बहुत ज्यादा जनसंख्या है. और ज्यादा क्यों जोड़ें? ‘बधाई हो’ में हमने सिर्फ यह बताने का प्रयास किया है कि समाज द्वारा निर्धारित आयु के बाद भी जोड़ों में अंतरंगता होती है.”

उन्होंने कहा, “हम यह क्यों मान लेते हैं कि जिन जोड़ों के बच्चे बड़े हो रहे होते हैं वे कभी सेक्स नहीं करते हैं. मेरी फिल्म में करते हैं. और वे कंडोम का उपयोग नहीं करते हैं क्योंकि जब वे आकर्षित हुए तो वहां कुछ उपलब्ध नहीं था. बच्चे को बनाए रखने का निर्णय उनका था. यह देर से गर्भ धारण करने को बढ़ावा देना नहीं है.”

गर्भवती मां का किरदार नीना गुप्ता को मिलने की कहानी बताते हुए उन्होंने कहा, “इसके लिए हम तब्बू जी के पास गए. उस समय हमारे दिमाग में अलग पटकथा थी और हमारे दिमाग में तब्बू मैम और इरफान खान सर थे. उन्होंने जब पटकथा सुनी तो उन्होंने उस किरदार के लिए नीना जी का सुझाव दिया. शायद वे वास्तव में ऐसी महिला लगती हैं जिनका पहले से ही एक बच्चा है.” शर्मा फिल्म को मिलने वाली सफलता और प्रशंसा के लिए सभी का आभार जता रहे हैं.

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