मीना कुमारी को दुनिया से अलविदा कहे चार दशक से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन आज भी उनकी तरह शोहरत और उंचा मुकाम कोई हासिल नहीं कर पाया है. चालीस सालों की उनकी ज़िन्दगी में जन्म से लेकर मौत तक दुख उनका पीछा करता रहा, उन्हें शान्ति उनकी अंतिम यात्रा के बाद ही हासिल हुई.

मीना कुमारी का जन्म 1 अगस्‍त, 1932 के रोज़ महज़बी के रूप में हुआ. घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने की वजह से चार साल की छोटी सी उम्र में मीना कुमारी को फ़िल्मी दुनिया में कदम रखना पड़ा. बाल कलाकार के रूप में चार फ़िल्में करने के बाद मीना कुमारी ने आखिरकार अपनी पहचान बना ही ली. उनकी अदाकारी के चर्चे ऐसे थे कि 1963 के दसवें फिल्‍मफेयर अवॉर्ड में उनकी तीन फ़िल्में बेस्‍ट एक्‍ट्रेस कैटेगरी के लिये नॉमिनेट हुई थीं और बाद में उन्हें ‘साहिब बीवी और गुलाम’ में ‘छोटी बहू’ के रोल के लिए अवार्ड दिया गया था.

पिता की मर्ज़ी के खिलाफ उन्होंने कमाल अमरोही से शादी की थी, लेकिन फिर भी उनकी निजी ज़िन्दगी सुख से न बीत सकी. जहां एक ओर उनके पति से झगड़े बढ़ रहे थे, वहीं दूसरी ओर वे शोहरत की सीढियां चढ़ती जा रही थीं. कमाल अमरोही पाकीज़ा बनाना चाहते थे और इस फिल्म के लिए फिर एक बार मीना कुमारी और कमाल एक साथ आए. कई बार शूटिंग रुकने के बाद अंततः उनकी ये फिल्म 4 फरवरी 1972 को रिलीज हुई. लेकिन इस वक्त तक मीना कुमारी की हालात बेहद खराब हो चली थी. फिल्म की रिलीज़ के कुछ ही दिनों बाद 31 अगस्त 1972 को मीना कुमारी का देहांत हो गया.

भले ही वे इस दुनिया को छोड़कर चली गई हो, लेकिन आज भी उनका चेहरा लोगों के ज़हन में बरकरार है. आइये उनके जन्मदिन के मौके पर सुनते हैं उनकी फिल्मों से कुछ बेहतरीन गीत.