जिंदगी, जैसे हम चाहते हैं वैसी ही चलती रहे तो कितना अच्छा हो. लेकिन अगर वैसा न हो, क्या करें? लड़े-झगड़े… विरोध करें… गुस्सा करें… नाराज हों… अंदर ही अंदर घुटते रहें. या फिर जो है उसी को अपना बना ले…. प्यार कर लें…. हवाओं के साथ बहने लगे. आसमान की असीमता को एक गहरी सांस से अपने अंदर खींच ले, अपने अंदर जितनी भी कड़वाहट है उसे खुला छोड़ दें…जाने दें…आसमां के ऊपर..जमीं से आगे…यही तो फिल्म है ‘बियांड द क्‍लाउड्स’. निर्देशक माजिद मजीदी का मास्टरपीस.  एक ऐसा सिनेमाई अनुभव, जो मानवीय मूल्यों, प्रेम, दोस्ती और परिवार के संबंध के जड़ों को छू जाता है. 

डायरेक्टर : माजिद मजीदी
संगीत : ए.आर.रहमान
कलाकार : ईशान खट्टर, मालविका मोहनन, तनिष्ठा चटर्जी
शैली : ड्रामा फिल्म

कहानी- हर इंसान के दिल में जन्म लेने वाली उम्मीद की कहानी है. बियांड द क्‍लाउड्स’. आमिर (ईशान खट्टर) और उसकी बड़ी बहन तारा (मालविका मोहनन) के इर्द-गिर्द कहानी घूमती है. गरीबी एक अभिशाप की तरह अंत तक दोनों के साथ चिपकी रहती है. मां-बाप की मौत के बाद आमिर अपनी बहन तारा के घर रहने लगता है लेकिन उसका शराबी पति उसे पीटकर घर से बाहर निकाल देता है. आखिरकार 13 साल की उम्र में आमिर अपनी बहन का घर छोड़कर भाग जाता है और ड्रग्स के धंध में फंस जाता है. लेकिन दोनों की एक बार फिर मुलाकात होती है. भाई पैसा कमाना चाहता है और बहन अपने भाई को बचाना. धोबी घाट पर बूढ़ा आदमी, अर्शी (गौतम घोष) हमेशा तारा पर बुरी नजर रखता है. फिर एक दिन अर्शी से जबरदस्ती करते वक्त एक हादसा हो जाता है. जो आमिर और तारा की जिंदगी बदल कर रख देता है. फिल्म की कहानी शानदार है. निराशा में एक आशा की किरण सी ‘बियांड द क्‍लाउड्स’ रुला देती है.

अभिनय- माजिद मजीदी की फिल्म बियांड दि क्लाउड्स एक ऐसा सिनेमाई अनुभव है, जो मानवीय मूल्यों, प्रेम, दोस्ती और परिवार के संबंध के जड़ों को छू जाता है. ईशान खट्टर ने अपनी पहली ही फिल्म से लोगों के दिलों पर गहरा असर किया है. ईशान, शाहिद कपूर के सहोदर भाई हैं. शुरू से अंत तक ईशान की ऐक्टिंग का जवाब नहीं है. ऐक्ट्रेस मालविका मोहनन ने भी अपने किरदार को जीवंत कर दिखाया है. मलयालम ऐक्ट्रेस मालविका मोहनन अपने किरदार में जान डाल दी है. फिल्म में तनिष्ठा चटर्जी की भूमिका काफी सीमित है, लेकिन अच्छी है.कई मामलों में माजिद मजीदी हॉलीवुड फिल्ममेकर डैनी बॉयल को टक्कर देते नजर आ रहे हैं.

कुछ और भी-डायरेक्टर मजीदी ऑस्कर नॉमिनेटेड डायरेक्टर हैं. मजीदी द सांग ऑफ़ स्पैरोज़, बारन, द कलर ऑफ़ पैराडाइज़ और चिल्ड्रेन ऑफ़ हेविन जैसी विश्व-प्रसिद्ध फ़िल्मों के लिए जाने जाते हैं.फिल्म की शूटिंग मुंबई में हुई है. घाट…चाल…कोठे को फिल्म में बहुत अच्छे ढंग से चित्रित किया गया है. कई जगह पर फिल्म 1997 में आई चिल्ड्रन ऑफ हेवन का विस्तृत वर्णन लगती है. माजिद ने मानवीय संवेदनाओं को फिल्म में इतनी खूबसूरती से पेश किया है एक पल के लिए पलक झुकाना भी बेमानी लगता है.  ईशान खट्टर ने अपनी पहली फिल्म से साबित कर दिया है कि वे लंबी रेस का घोड़ा है. बेहद सहज और संजीदा अंदाज वे इस फिल्म में नजर आए हैं. सिनेमेटोग्राफर अनिल मेहता का काम भी शानदार है. हालांकि फिल्म में ए.आर.रहमान का संगीत कुछ ज्यादा आकर्षित नहीं करता है. अगर आप लीक से हटकर देखने के शौकीन हैं तो ये आपके लिए ये मस्ट वॉच फिल्म है.

 

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