नई दिल्ली. भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री ने भले ही अपनी सिनेमा जगत में 6 दशक पूरे कर लिए हों. आज हर साल 100 से ज्यादा फिल्में बनने लगी हों, लेकिन इसके माथे पर कुछ ऐसी फिल्मों के ‘नाम’ वाले दाग हैं, जो हमेशा इसे सिनेमा के इतिहास में कमतर साबित करते रहेंगे. लोक भाषा की मधुरता से उठकर इंडस्ट्री के रूप में संवर रहा भोजपुरी सिनेमा का संसार ऐसी फिल्मों से खुद को हीन महसूस करता है. जी हां, ‘लॉलीपॉप लागेलू’, ‘तनी सा जींस ढीला कर…’ और ऐसे न जाने कितने भोजपुरी फिल्मी गाने भोजपुरी सिनेमा को भले ही कुछ दिनों तक के लिए चर्चा में ला देते हैं, लेकिन दूरगामी नजरिए से देखें तो यह इस इंडस्ट्री के लिए नुकसानदेह होते हैं. उदाहरण के लिए, ‘एक रजाई तीन लुगाई’, ‘तोहरे कारण गइल भैंसिया पानी में’, ‘कट्टा तनल दुपट्टा पर’, ‘मेहरारू चाही मिल्की व्हाइट’ जैसी कुछ फिल्में हैं, जो आपको न चाहते हुए भी हंसने के लिए मजबूर कर देती हैं. ये फिल्में भोजपुरी सिनेमा के लिए तो नुकसानदेह हैं ही, भोजपुरी भाषा को भी मजाक का पर्याय बना देती हैं. ऐसी ही कुछ फिल्मों के पोस्टर हम लाए हैं, आप भी देखें.

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‘भोजीवुड’ इंडस्ट्री कर रही 2 हजार करोड़ से ज्यादा का कारोबार
भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री यानी ‘भोजीवुड’ आज की तारीख में 2 हजार करोड़ से ज्यादा का कारोबार कर रही है. आंचलिक सिनेमा के संसार में यह आज सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ती हुई फिल्म इंडस्ट्री है. दक्षिण भारत में बनने वाली फिल्में हों या बंगाली और मराठी फिल्में, भोजपुरी फिल्में अपने दुनियाभर में फैले भोजपुरीभाषी दर्शकों की बदौलत तेजी से लोकप्रियता अर्जित कर रही है. ऐसा नहीं है कि भोजपुरी में सिर्फ खराब या हास्यास्पद नाम वाली ही फिल्में बनती हों, गंभीर विषयों पर आधारित फिल्में भी बनती हैं. लेकिन हंसोड़ या चलताऊ नाम वाली फिल्मों के कारण गंभीर फिल्मों की तरफ अन्य भाषा के दर्शकों का ध्यान जा ही नहीं पाता है. हिन्दी या अन्य भाषाई दर्शकों के बीच भोजपुरी फिल्मों को लेकर खराब धारणा बन जाती है.

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भोजपुरी भाषाप्रेमी दुखी होते हैं ऐसी फिल्मों से
भोजपुरी भाषा बोलने वालों की संख्या सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि भारत से बाहर भी कई देशों में है. देश में भी बिहार और उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, मुंबई, गुजरात, बंगाल और कई अन्य राज्यों में भोजपुरी भाषा की फिल्में देखी और सराही जाती हैं. लेकिन वहां भी चलताऊ नाम वाली फिल्मों से भोजपुरी समाज का मन दुखी होता है. भोजपुरी फिल्मों के नामी-गिरामी निर्देशक नितिन चंद्रा ने सालभर पहले मीडिया से बातचीत में कहा भी था कि ‘लॉलीपॉप लागेलू’ या ‘तनी सा जींस ढीला कर’ जैसे गाने न सिर्फ भोजपुरी फिल्मों का स्तर घटाते हैं, बल्कि यह भोजपुरी भाषा की मिठास को भी मजाक का पात्र बना देते हैं. चंद्रा ने इस बात पर भी दुख जताया था कि भोजपुरी फिल्मों को चलाने के नाम पर उसमें जबरन अश्लीलता परोसी जाती है. उन्होंने कहा था कि ऐसी फिल्में हमारी इंडस्ट्री को नुकसान पहुंचाएगी.

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छोटे से लेकर बड़ा अभिनेता भी ऐसी फिल्मों में शामिल
भोजपुरी सिनेमा में चलताऊ नाम वाली फिल्मों में ऐसा नहीं है कि सिर्फ कम प्रसिद्ध अभिनेताओं ने ही ऐसी फिल्में की हैं. भोजपुरी सिनेमा के स्थापित या प्रसिद्ध अभिनेता भी ऐसी फिल्में गाहे-बगाहे करते रहे हैं. चाहे वह भोजपुरी सिनेमा का नया दौर शुरू करने वाले अभिनेता और वर्तमान में भाजपा के सांसद मनोज तिवारी हों या फिर रविकिशन. शुरुआती दौर में इन स्टारों ने भी ऐसी कई चलताऊ फिल्मों में काम किया है, जिनके नाम मजाकिया लहजे के होते थे. इनके अलावा बाद के दिनों में कई ऐसे अभिनेताओं ने ऐसी फिल्में की, जिसका नाम ही ऐसा रखा जाता था कि वह चलताऊ लगे. या फिर ऐसी नाम वाली फिल्में ही बनाई जाने लगी थीं जो सस्ते मनोरंजन को बढ़ावा देने वाली होती हैं.

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