बर्थडे स्पेशल: मन्ना डे के जन्मदिन पर सुनें उनके कुछ बेहतरीन गानें

मन्ना ने पहली बार फिल्म 'तमन्ना' (1942) के लिए सुरैया के साथ गाया था

Published date india.com Updated: May 1, 2017 4:20 PM IST

भारतीय फिल्म जगत के बेहतरीन गायक प्रबोध चंद्र डे उर्फ मन्ना डे का आज जन्मदिन है. मन्ना डे का जन्म 1 मई 1920 को कोलकाता में हुआ था. मन्ना डे के पिता उन्हें वकील बनाना चाहते थे, लेकिन उनका मन संगीत की ओर था और वह इसी क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते थे. मन्ना डे ने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा अपने चाचा के सी डे से हासिल की.

मन्ना डे की मां का नाम महामाया और पिता का नाम पूर्णचंद्र डे था. उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा इंदु बाबुरपुर पाठशाला से लिया और विद्यासागर कॉलेज से स्नातक किया. इसके साथ ही उन्हें कुश्ती और मुक्केबाजी काफी पसंद था वो हर प्रतियोगिता में बढ़ चढ़ कर भाग लिया करते थे.

एक बार जब उस्ताद बादल खान और मन्ना डे के चाचा साथ में रियाज कर रहे थे, तभी बगल के कमरे में बालक मन्ना भी गा रहे थे. बादल खान ने कृष्ण चंद्र डे से पूछा कि यह कौन गा रहा है, तो उन्होंने मन्ना डे को बुलाया. वह उनकी प्रतिभा पहचान चुके थे और तभी से मन्ना अपने चाचा से संगीत की तलीम लेने लगे.

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मन्ना ने पहली बार फिल्म ‘तमन्ना’ (1942) के लिए सुरैया के साथ गाया. जिसके बाद एक के बाद एक करके उन्होंने कई फिल्मों में अपने गीत गाए. साल 1961 में आई फिल्म ‘काबुली वाला’ के गीत ‘ऐ मेरे प्यारे वतन’ को आज भी सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है. वैसे इस गाने ने उन्हें शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचा दिया.

फिल्म ‘पड़ोसन’ (1968) के गीत ‘एक चतुर नार’ आज भी लोगों को बेहद पसंद हैं. ये गाना अपने समय का सबसे पसंदीदा गानों में से एक था.

मन्ना डे की शादी 18 दिसंबर, 1953 को केरल की सुलोचना कुमारन से हुई थी. उनकी दो बेटियां शुरोमा और सुमिता हैं. फिल्म ‘मेरे हुजूर’ (1969), बांग्ला फिल्म ‘निशि पद्मा’ (1971) और ‘मेरा नाम जोकर’ (1970) के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक का फिल्म फेयर अवार्ड मिला था.

भारत सरकार ने उन्हें 1971 में पद्मश्री, 2005 में पद्मभूषण से सम्मानित किया. 2004 में उन्हें रवींद्र भारती विश्वविद्यालय ने डी.लिट. की मानद उपाधि से सम्मानित किया. संगीत के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया.

23 अक्टूबर, 2013 को शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया. 24 अक्टूबर की सुबह 4.30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली.

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