फिल्म इंडस्ट्री में बेहद मुश्किल है मेकअप आर्टिस्ट्स का काम, ऐसे मिलती है पहचान

मेकअप डिजाइन की दुनिया केवल हॉलीवुड में ही नहीं, बॉलीवुड में भी बड़े पैमाने पर बदल रही

Published date india.com Updated: January 30, 2019 1:06 PM IST
फिल्म इंडस्ट्री में बेहद मुश्किल है मेकअप आर्टिस्ट्स का काम, ऐसे मिलती है पहचान

अपने पसंदीदा कलाकार को पर्दे पर किसी अनूठे रूप में देखकर आप भले ही हैरान रह जाते हों और उसके और ज्यादा कायल हो जाते हों, लेकिन जिस किरदार को वे निभा रहे होते हैं, उसमें जान डालने में कलाकारों के कौशल के आलावा और भी कई चीजों का हाथ होता है. किरदार के लुक को वास्तविक ढंग से दर्शाने में एक कुशल प्रोस्थेटिक, हेयर और मेकअप आर्टिस्ट का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है.

मेकअप डिजाइन की दुनिया केवल हॉलीवुड में ही नहीं, बॉलीवुड में भी बड़े पैमाने पर बदल रही है और अब बॉलीवुड में भी मेकअप और प्रोस्थेटिक्स मेकअप आर्टिस्ट्स को पहचान मिलने लगी है और अब उन्हें फिल्म निर्माण का महत्वपूर्ण हिस्सा समझा जाने लगा है. यह कहना है बॉलीवुड की कई सफल फिल्मों के लिए कलाकारों का लुक डिजाइन कर चुकीं ब्रिटिश मेकअप आर्टिस्ट क्लोवर वुट्टॉन का.

मेकअप डिजाइन और प्रोस्थेटिक्स की बात करें तो हॉलीवुड और बॉलीवुड में क्या अंतर पाती हैं, इस सवाल पर क्लोवर ने आईएएनएस से एक इंटरव्यू में कहा, “बॉलीवुड में, मेकअप डिजाइन को इस बात के महत्वपूर्ण हिस्से के तौर पर लिया जाने लगा है कि फिल्म कैसी दिखेगी. किसी भी कहानी को सपोर्ट करने और किरदारों को जीवंत करने में अब इसकी भूमिका को भी खास महत्व दिया जाने लगा है. हमेशा से यह स्थिति नहीं थी, लेकिन अब मेकअप आर्टिस्ट्स को आखिरकार उनके रचनात्मक काम के लिए सराहा जाने लगा है.”

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मेकअप डिजाइन और प्रोस्थेटिक्स की जादुई छड़ी का इस्तेमाल करके वुट्टॉन ‘परी’ में अनुष्का शर्मा, ‘संजू’ में रणबीर कपूर, ‘बाजीराव मस्तानी’, ‘पाच्र्ड’ और हाल ही में रिलीज हुई ‘जीरो’ समेत कई फिल्मों के कलाकारों के लुक तैयार कर चुकी हैं, जो बेहद चर्चा में रहे. ब्रिटिश मेकअप आर्टिस्ट क्लोवर कई भारतीय मेकअप और हेयर आर्टिस्ट के साथ मिलकर काम कर चुकी हैं, मेकअप और प्रोस्थेटिक्स की दुनिया में हलचल मचाने और फिल्म निर्माण के इस हिस्से को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में हॉलीवुड और बॉलीवुड आर्टिस्ट्स का तालमेल कितना अहम है.

इस सवाल पर क्लोवर ने कहा, “किसी भी चीज को सीखने और उसमें आगे बढ़ने और साथ ही अपने आसपास मौजूद आर्टिस्ट्स को साथ लेकर चलने के लिए आपसी तालमेल सबसे अच्छा माध्यम है, जो एक-दूसरे से अपना काम और अपने अनुभव बांट सकते हैं, सहयोग कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे को गाइड कर सकते हैं. कई भारतीय मेकअप स्टूडेंट्स विदेशों में काम कर रहे हैं या ट्रेनिंग ले रहे हैं और कई विदेशी आर्टिस्ट फिल्म प्रोजेक्ट के सिलसिले में यहां आते हैं, इसलिए आदान-प्रदान और सीखने के काफी अवसर उपलब्ध हैं.”

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