बॉलीवुड एक्ट्रेस सेलिना जेटली ने एलजीबीटी (समलैंगिक, बाइसेक्शुअल, ट्रांसजेडर) समुदाय के हक में आए फैसले पर अपने विचार सामने रखे हैं. उनका कहना है कि इस समुदाय के अधिकारों के लिए लड़ने के कारण उनके करीबी, दोस्तों और परिवार ने उनका साथ छोड़ दिया था, लेकिन वह इससे घबराई नहीं और आगे बढ़ती गई. सेलिना ने इसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा सेक्शन 377 पर फैसला सुनाते हुए समलैंगिकता को वैध घोषित करने को ऐतिहासिक फैसला बताया.

फैसले की सराहना करते हुए सेलिना ने कहा, “मैंने एलजीबीटी एक्टिविस्ट के रूप में अपने जीवन के पिछले 15 वर्षों से हर दिन आशा और उम्मीद के साथ इसका इंतजार किया और आखिरकार यह हो गया. एक सच्चे देशभक्त के रूप में हमेशा से मेरा एक सिद्धांत था कि मैं भेदभाव स्वीकार नहीं करूंगी या किसी भी संस्कृति के हिस्से के रूप में हिंसा को बढ़ावा नहीं देना चाहिए.”


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‪15 years of my life as a #lgbt activist I waited every single day with a prayer and hope to see and witness this historic day, I cannot imagine what my #lgbt fellow citizens felt all these years being victims of an archaic system, the immense ostracism and criticism I faced as a straight ally and #lgbt activist is not even a patch on it, I was ostracised by colleagues, friends & family too for fighting for #lgbt rights, it did not deter me .. kept me going for I knew there were millions going on without a right to life, without dignity, without being able to breathe freely and without feeling safe. Today is a historic day, our apex courts have given dignity to millions within our country, What a judgement !! … years of struggle & fighting for equal rights for many has paid off, Today history is made, millions will breath the first breath of freedom… God bless our Indian rainbow 🌈 #lgbt #377 together we will build a world that is free and equal !! #lgbt #section377 #celinajaitly #celinajaitley #celina #jaitly #bollywood #un #freeandequal #mylife #historicevent ‬

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अभिनेत्री ने कहा, “एलजीबीटी अधिकारों के लिए लड़ने के कारण सहकर्मियों, दोस्तों और यहां तक कि परिवार ने भी मेरा साथ छोड़ दिया, लेकिन मैं इसेस घबराई नहीं और आगे बढ़ती गई क्योंकि मैं जानती थी कि लाखों लोग जीवन के अधिकार के बिना, सम्मान के बिना, खुले में सांस लेने की आजादी के बिना और सुरक्षित महसूस किए बिना आगे बढ़ रहे हैं.”

बता दें कि, भारतीय दंड संहिता की धारा 377 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरूवार को फैसला सुनाया. 5 जजों की संविधान पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के पहले दिए फैसले को बदलते हुए कहा, आईपीसी की धारा 377 गैरकानूनी है. समलैंगिकता अपराध नहीं है. दो बालिगों की सहमति से बनाया गया अप्राकृतिक संबंध जायज है.