नई दिल्ली: ब्रांड मोदी के भरोसे एक बार फिर 2019 का मैदान मारने की तैयारी है. चुनाव में अभी 10 महीने का समय बचा है, लेकिन बीजेपी ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी है. इसी कड़ी में पीएम मोदी के जीवन से जुड़ी छोटी फिल्में रिलीज होंगी. लोकसभा चुनाव से पहले इन फिल्मों को रिलीज करना बीजेपी की रणनीति का हिस्सा है. इन्हीं में से एक फिल्म है चलो जीते हैं. फिल्म 29 जुलाई को रिलीज हो रही है. फिल्म के निर्माता महेश हडावले हैं. फिल्म के प्रमोशन में पार्टी और इसके नेता अभी से जुट गए हैं. फिल्म के बारे में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, जयंत सिन्हा, राज्यवर्धन राठौर और प्रकाश नड्डा सहित कई मंत्री ट्वीट कर रहे हैं. Also Read - CoronaVirus Vaccine Price: जल्द मिलेगी कोरोना वैक्सीन, क्या होगी कीमत, कैसे लगेगा टीका, जानिए

बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के ट्वीट किया, ‘चलो जीते हैं… नरेन्द्र मोदी जी के बचपन पर आधारित फिल्म हमें जीवन जीने के गुर सिखाती है.’ हालांकि इस फिल्म के निर्माता सीधे सीधे ये कहने से बच रहे हैं कि ये फिल्म पीएम मोदी के जीवन पर आधारित है, लेकिन इस फिल्म की किसी भी एक झलक को देखकर समझा जा सकता है कि ये फिल्म प्रधानमंत्री के बचपन पर आधारित है. ये पहली बार है जब पार्टी किसी फिल्म को इतने बड़े स्तर पर प्रमोट कर रही है. राष्ट्रपति भवन में मंगलवार को इस फिल्म का विशेष शो आयोजित किया गया था. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस फिल्म को राष्ट्रपति कोविंद ने भी देखी.

बीजेपी के ऑफिशियल ट्वीटर हैंडल के साथ ही बीजेपी राजस्थान, बीजेपी उत्तर प्रदेश और बीजेपी दिल्ली सहित बीजेपी की कई राज्य इकाइयों के ट्वीटर हैंडल से इस फिल्म को प्रमोट किया गया है. इस फिल्म में एक जगह मुख्य पात्र नारू कहता है, ‘मां तुम सबके लिए जीती हो, मगर मैं किसके लिए जी रहा हूं. फिर वो सबसे यही सवाल पूछते हैं कि आप किसके लिए जीते हो. फिर उनके अध्यापक भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव का नाम लेकर कहते हैं कि ये लोग देश के लिए जीए. और फिर नारू ने अपने देशवासियों के लिए जीने का फैसला कर लिया.

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले भी नरेंद्र मोदी के बचपन पर आधारित एक कॉमिक्स आई थी, जिसका नाम बाल नरेंद्र था. उस कड़ी में अब उनके बचपन पर आधारित फिल्म आ रही है. जानकारों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी का बचपन कुछ ऐसा है, जो हर किसी को भावनात्मक रूप से उनसे जोड़ता है. प्रधानमंत्री खुद कई बार अपने भाषण में अपने बचपन की परिस्थितियों का जिक्र कर चुके हैं.