दीपिका पादुकोण स्टारर फिल्म छपाक का ट्रेलर रिलीज हो गया है. दीपिका ने एसिड सर्वाइवर का किरदार निभाया है. वीडियो को देखकर लगता है कि उन्होंने सिर्फ इस किरदार को निभाया ही नहीं बल्कि उस दर्द को जीया है. यही वजह है कि मुंबई में ट्रेलर लॉन्च के दौरान वे फिल्म के बारे में ज्यादा बोल नहीं पाईं. उनका गला रुंध गया. आंखों से आंसू छलक पड़े. वे फफक-फफक कर रो पड़ीं. कहानी भी तो ऐसी ही लड़की की है. नाम है लक्ष्मी अग्रवाल. जिस मनचले ने लक्ष्मी पर एसिड फेंका वो उसकी तो नहीं हुईं लेकिन सारी दुनिया की हो गई.

Deepika Padukone/ Laxmi Agarwal (Photo Courtesy: Instagram/ @thelaxmiagarwal)

एक नार्मल सी जिंदगी जी रही साधारण सी लड़की. आंखों में कई सपने लिए. खुली हवा में सांस लेती. चहचहाती. बड़ा बनने का सपना लेकर रोज घर से बाहर निकलती. लक्ष्मी. लेकिन. एक दिन कुछ ऐसा होता है कि उसकी जिंदगी ही बदल जाती है. चेहरा बदसूरत हो जाता है. मन टूट जाता है. सपने बिखर जाते हैं. लेकिन संघर्ष जारी रहता है. इंसाफ मिलने की उम्मीद खत्म नहीं होती. कोर्ट के चक्कर. वकीलों के सवाल. पुलिस की तफ्तीश. लोगों के ताने. लड़की होने का अपराध बोध. दिल- दिमाग की उथल-पुथल. चार साल तक चेहरे को ढककर चलना. अकेले में रोना. अंदर ही अंदर घुटना. वो दिन आसान नहीं थे. फिर अचानक इस हादसे के बाद पापा और भाई की मौत हो जाती है. लेकिन लक्ष्मी ने हिम्मत नहीं हारी. वो लड़ती रही. उसका मानना था एसिड शरीर पर गिरा है मन पर नहीं. बचपन से उसने गायिका बनने का सपना देखा था.

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साल 2006 में लक्ष्मी ने एक पीआईएल डाली और सुप्रीम कोर्ट से एसिड बैन करने की मांग की’. उसका कहना था कि काश! ये एसिड बिकता ही नहीं. ना बिकता तो बाजार में ना मिलता. बाजार में ना मिलता तो ऐसे ना फिकता. इसके बाद लक्ष्मी उन सैकड़ों एसिड अटैक पीड़िताओं की आवाज बन गईं जो अपने लिए न्याय मांग रही थीं. फिर उसे एसिड अटैक पीड़ितों के लिए एनजीओ चलाने वाले आलोक से प्यार हो गया. कुछ समय बाद लक्ष्मी ने पीहू को जन्म दिया. लक्ष्मी आज खुश है. लेकिन उसकी लड़ाई खत्म नहीं हुई है. वो चलती रहेगी.

मेघना गुलजार द्वारा निर्देशित, फिल्म 10 जनवरी 2020 को रिलीज़ होने के लिए पूरी तरह से तैयार है.