चीन से आए कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है. देश-दुनिया के ना जाने कितने ही लोगों को निगल लिया है. कोरोना के कहर से बचने के लिए देश भर में लॉकडाउन कर दिया गया है. लोगों ने खुद को घरों में कैद कर लिया है. ऐसे में सरकार के आलावा आम लोग भी एक-दूसरी की मदद के लिए आगे आ रहे हैं. इसी बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने भी इस संकट से उबरने और कोरोना को चुनौती देने के लिए ‘प्रकाश’ का हथियार उठाने को कहा है. मोदी ने कहा कि इस 5 अप्रैल को रात नौ बजे घर की सभी लाइटें बंद करके घर के दरवाजे या बालकनी में मोमबत्ती, दिया, टॉर्च या मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाकर हमें कोरोना के सामने अपनी महाशक्ति का परिचय करवाना है. Also Read - बिग बॉस 14 में जाने की खबरों को लेकर अध्ययन सुमन ने कहा- थैंक्स पर नो थैंक्स

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सनातन धर्म में रोशनी का महत्व
सनातन धर्म में दीपक की रोशनी को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है. ये अपने तेज प्रकाश से जीवन में रोशनी भर देता है. दीपक जलाने को सकारात्‍मक रूप में देखा जाता है. इसका अर्थ अपने जीवन से अंधकार हटाकर प्रकाश फैलाने से भी जोड़ा जाता है. कहा जाता है एक दीपक दुख, दारिद्रय और दुर्भाग्य को दूर करता है. ईश्वर को प्रसन्न करके अपने दुखों को हरने के लिए दीया जलाया जाता है. आपदा से मुक्ति और कष्टों को दूर करने के लिए भी हमारे शास्त्रों में दीया जलाने को कहा गया है. घी का दीपक लगाने से घर में सुख समृद्धि आती है. रोशनी को रक्षा कवच भी माना गया है. इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है. साथ ही नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है. भारतीय परंपरा में माना जाता है कि ईश्वर हमारे सामने प्रकाश के रूप में है. Also Read - रश्मि देसाई ने छोड़ा देसी अंदाज, मॉडर्न क्वीन बनकर ढाया कहर, लाखों बार देखा गया Video

VVS Laxman on Twitter: "May Lord Rama bestow peace and happiness ...

श्रीराम के अयोध्या लौटने पर जलाए गए थे दीये
श्रीराम के अयोध्या लौटने पर दीये जलाए गए थे.  ऐसा माना जाता है जब कार्तिक अमावस्या को भगवान श्रीराम अपना चौदह वर्ष का वनवास पूरा करके अयोध्या लौटे थे. अयोध्या वासियों ने श्रीराम के लौटने की खुशी में दीप जलाकर खुशियां मनायी थीं. संपूर्ण शहर का रंग-रोगन कर उसको दीपकों से सजाया गया था. इससे अभिप्राय था कि लोगों के दुख खत्म हुए. भगवान राम के विरह की पीड़ा से लोगों को मुक्ति मिली थी और उनके आगमन की खुशी में लोगों ने अपनी भावनाओं को इस तरह जाहिर किया था.

कंचन कलस बिचित्र संवारे.सबहिं धरे सजि निज निजद्वारे॥
बंदनवार पताका केतू. सबन्हि बनाए मंगल हेतू॥1॥
भावार्थ:- सोने के कलशों को विचित्र रीति से ( स्वण माणिक्य से)अलंकृत कर और सजाकर सब लोगों ने अपने-अपने दरवाजों पर रख लिया.सब लोगों नेमंगल के लिए बंदनवार, ध्वजा और पताकाएं लगाईं॥1॥

File Photo

अटल बिहारी वाजपेयी ने भी दीये पर लिखी है कविता
आओ फिर से दिया जलाएँ
भरी दुपहरी में अंधियारा
सूरज परछाई से हारा
अंतरतम का नेह निचोड़ें-
बुझी हुई बाती सुलगाएँ.
आओ फिर से दिया जलाएँ

हम पड़ाव को समझे मंज़िल
लक्ष्य हुआ आंखों से ओझल
वतर्मान के मोहजाल में-
आने वाला कल न भुलाएँ.
आओ फिर से दिया जलाएँ.

आहुति बाकी यज्ञ अधूरा
अपनों के विघ्नों ने घेरा
अंतिम जय का वज़्र बनाने-
नव दधीचि हड्डियां गलाएँ.
आओ फिर से दिया जलाएँ

PM Narendra Modi

मनोबल बढ़ाती है रोशनी, एक-एक दीये से होता है महाशक्ति का अहसास
पीएम मोदी ने इस संकट की घड़ी में लोगों को संदेश देते हुए कहा कि , ‘चारों तरफ हर व्यक्ति जब एक-एक दिया जलाएगा तो प्रकाश की उस महाशक्ति का अहसास होगा, जिसमें यह उजागर होगा कि हम सब एक ही मकसद से लड़ रहे हैं. अंधकारमय कोरोना संकट को पराजित करने के लिए प्रकाश के तेज को चारों दिशाओं में फैलाना है. इस 5 अप्रैल को हमें, 130 करोड़ देशवासियों की महाशक्ति का जागरण करना है.

मोदी ने कहा , ”उस प्रकाश में, उस रोशनी में, उस उजाले में, हम अपने मन में ये संकल्प करें कि हम अकेले नहीं हैं, कोई भी अकेला नहीं है. खासकर जब देश इतनी बड़ी लड़ाई लड़ रहा हो तो जनता रूपी महाशक्ति का साक्षात करते रहना चाहिए. जो अंधकार में हैं, उन्हें आशा की ओर ले जाना है. उसे समाप्त करना होगा, इस अंधकार में कोरोना संकट को पराजित करने के लिए हमें प्रकाश के तेज को चारों दिशाओं में फैलाना है.