दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंग ने एक हज़ार हफ्ते पुरे किये। इस फिल्म ने एक तरह से हिंदी सिनेमा को शाहरुख़ खान और काजोल को नए युग का सबसे चहेती जोड़ी बना दिया। अमिताभ बच्चन – रेखा के बाद यही वो जोड़ी है जिसका जादू सिने प्रेमियों के सिर चढ़ा है।

इन एक हज़ार हफ़्तों में दिलवाले या DDLJ से जुडी बहुत सारी चीज़े भी बदल गयी हैं। मसलन शाहरुख़ आज भी यदाकदा राज बने नज़र आ जाते हैं लेकिन उनकीं सिमरन गायब हैं। ये हिंदी सिनेमा की बड़ी ही अजीब बात है। हीरो साल दर साल चलते रहते हैं लेकिन अभिनेत्री कुछ समय बाद अलग अलग कारणों के चलते पहले कम और फिर दिखना ही बंद हो जाती हैं।

बहरहाल यहाँ हम बात कर रहे हैं दिलवाले… की। इस फिल्म ने दरवाज़े खोले थे NRI मार्किट का जिसे आगे चलके यशराज और करण जोहर जैसे निर्माताओं ने जमकर भुनाया। लेकिन दिलवाले… जैसी सफलता कम ही मिली।

कुछ लोगों का तो यह भी मानना है की फिल्म को रिकॉर्ड बनाने के लिए ही मराठा मंदिर में लगे रहने दिया। जहाँ तक बात है फिल्म की तो इसका संगीत आज भी काफी लोकप्रिय है और शायद ही कोई शादी हो जिसमे मेहँदी लगा के रखना गाने पे नाच न होता हो। जब फिल्म के गाने रिकॉर्ड हो रहे थे तब एक मक्खी ने रिकॉर्डिंग स्टूडियो में डेरा जमा लिया था और तमाम कोशिशों के बाद भी जाने का नाम नहीं ले रही थी। तब लता मंगेशकर ने कहा था इस फिल्म के गाने हैं ही इतने मीठे की मक्खी भी इनको पसंद कर रही है।

इन हज़ार हफ़्तों में फिल्म से जुड़े कई लोग आज कम ही नज़र आते हैं।

लता मंगेशकर जी आजकल बहुत कम गाने गा रही हैं वहीँ जतिन-ललित की जोड़ी भी टूट गयी है। इस फिल्म से जुड़े तीनों पार्शवगायक – उदित नारायण, कुमार सानु और अभिजीत आजकल अब कम ही सुनाई देते हैं। लेकिन अब भी जब फिल्म के गाने उतने ही ताज़ा लगते हैं जितने जब ये फिल्म रिलीज़ हुई थी।

आज के दौर में जब फ़िल्मे चंद हफ़्तों में पर्दों से गायब हो जाती है, दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे के हज़ार हफ़्तों की कामयाबी का जशन एक बड़ी बात है। क्यूंकि इतने बड़े बॉलीवुड में ऐसी छोटी छोटी बातें कम ही होती हैं।