डिअर ज़िन्दगी रिव्यु: शाहरुख़ खान के फैन्स के लिए एक खूबसूरत ट्रीट

रेटिंग: * * *

Published date india.com Published: November 25, 2016 2:45 PM IST
Dear Zindagi Review: A treat for Shah Rukh Khan fans | डिअर ज़िन्दगी रिव्यु: शाहरुख़ खान के फैन्स के लिए एक खूबसूरत ट्रीट

कहते हैं की पिछले कुछ सालों में हमारी बॉलीवुड फिल्मों में बहुत बदलाव आएं हैं। हमें पिछले कुछ सालों में कुछ ऐसे फिल्ममेकर्स मिले हैं जिनके काम करने के तरीके ने हमारा दिल जीत लिया है। लोगों का मानना है की ये फिल्ममेकर्स अब हॉलीवुड को टक्कर देती फिल्में बनाते हैं। सब से अहम बात ये है की कुछ फिल्ममेकर्स की फिल्म ऐसी होती हैं जिससे युवा कनेक्ट हो पाते हैं। ऐसी ही एक फिल्ममेकर हैं गौरी शिंदे जिनकी पहली फिल्म ‘इंग्लिश विन्ग्लिश’ ने सबको अपना फैन बना लिया था। गौरी शिंदे की दूसरी फिल्म ‘डिअर ज़िन्दगी’ भी रिलीज़ हो चुकी है। इस फिल्म में शाहरुख़ खान और आलिया भट्ट मुख्या भूमिका में हैं। गौरी शिंदे और उनकी इस फिल्म से लोगों को खूब उम्मीद है लेकिन फिल्म उम्मीद पर उतनी खरी नहीं उतर पाई है जितना लोगों ने सोचा था।

कहानी शुरू होती है कायेरा (आलिया भट्ट) से जो एक मेहनती सिनेमाटोग्राफर है। उसका सपना है एक पूरी फिल्म बनाने का। उसकी ज़िन्दगी में रघुवेंद्र (कुनाल कपूर) आता है। कायेरा उसे पसंद करने लगती है और उसके लिए अपने बॉयफ्रेंड सीड (अंगद बेदी) को छोड़ देती है। रघुवेंद्र भी कायेरा से प्यार करता है और उसे प्रपोज भी करता है लेकिन कायेरा उसे कमिटमेंट नहीं देती। थोड़े दिनों बाद कायेरा को पता चलता है की रघुवेंद्र की सगाई हो गयी है। वो टूट जाती है क्योंकि वो उसे सच्चा प्यार करने लगी थी। कायेरा का दिल टूट जाता है और वो काम से ब्रेक लेकर अपने माता पिता के घर गोवा चली जाती है लेकिन वहां भी वो बेचैन रहती है और डिप्रेशन में चली जाती है। अपने इलाज के लिए वो साइकाइट्रिस्ट यानि डॉक्टर जहांगीर खान (शाहरुख़ खान) से मिलती है। धीरे-धीरे वो खुद को और अपनी प्रॉब्लम को समझने लगती है।

फिल्म के टीज़र को देखकर लगा था की फिल्म बहुत ही अच्छी होगी लेकिन फिल्म ठीक-ठाक ही है। फिल्म का सबसे वीक पॉइंट उसकी स्क्रिप्ट है। कहानी कुछ ख़ास नहीं है और उसे बिना वजह खींचा गया है। एक वक़्त के बाद आप बोर हो जाते हैं की आखिर फिल्म में चल क्या रहा है। फिल्म का पहला हाफ ठीक ठाक है जिसमे फिल्म करैक्टर का बस इंट्रोडक्शन ही हो पता है। सेकंड हाफ बेहद स्लो है। आप को नींद भी आ जाएगी। गौरी शिंदे क्या दिखाने की कोशिश कर रहीं थी वो शायद खुद ही नहीं जानती।

फिल्म का बेस्ट पार्ट शाहरुख़ खान है। किंग खान की एक्टिंग और लुक आपको अपना दीवाना बना लेगी। आप सोचेंगे की आखिर वो ऐसे रोल हमेशा क्यों नहीं करते। शाहरुख़ खान ने जिस तरह फिल्म को संभाला है वो काबिले तारीफ है। आलिया भट्ट ने भी बहुत अच्छी एक्टिंग की है। हर इमोशन को उन्हें बहुत ख़ूबसूरती से दिखाया है। उनकी और शाहरुख़ की जोड़ी बेहद प्यारी लगती है।

फिल्म में शाहरुख़ और आलिया के लिए अगर कुछ देखने लायक है तो वो है फिल्म का आखिरी 30 मिनट। फिल्म का क्लाइमेक्स आपके दिल को छु जाएगा और कहीं न कहीं आप भी इस फिल्म से क्लाइमेक्स के दौरान कनेक्ट होता महसूस करेंगे। क्लाइमेक्स की वजह से ही ये फिल्म संभली है।

कूल मिलाकर ये एक ठीक ठाक फिल्म है। इसे शाहरुख़ खान के attitude और आलिया की एक्टिंग के लिए ज़रूर देखें।

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