दिल्ली हाईकोर्ट ने जाह्न्वी कपूर अभिनीत फिल्म ‘गुंजन सक्सेना : द कारगिल गर्ल’ की स्ट्रीमिंग पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. न्यायमूर्ति राजीव शकधर की अध्यक्षता वाली एकल न्यायाधीश की पीठ ने केंद्र सरकार और भारतीय वायुसेना द्वारा दायर एक याचिका पर विचार-विमर्श किया, जिसमें दावा किया गया है कि फिल्म में भारतीय वायुसेना (आईएएफ) की खराब छवि को दर्शाया गया है. Also Read - NCB का खुलासा- रिया चक्रवर्ती ड्रग्स तस्करी की एक्टिव मेंबर, सुशांत और बड़े लोगों को करती थीं सप्लाई

अदालत ने कहा, “आपको (केंद्र) फिल्म के रिलीज होने के समय अदालत का दरवाजा खटखटाना था. मैं आपकी चिंता को समझता हूं, लेकिन इस स्तर पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता, क्योंकि फिल्म पहले से ही रिलीज हो चुकी है.” Also Read - Drugs Case: मीडिया से खफा रकुल प्रीत ने कोर्ट में कहा- ना सिगरेट पीती हूं ना शराब, ड्रग्स का तो सवाल ही नहीं पैदा होता फिर..

पीठ ने फिल्म का निर्माण करने वाली धर्मा प्रोडक्शंस प्राइवेट लिमिटेड और नेटफ्लिक्स से फिल्म की स्ट्रीमिंग को रोकने के लिए केंद्र की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है. फिल्म निर्माता करण जौहर को भी नोटिस जारी किया है, जो फिल्म के सह-निर्माताओं में से एक हैं. Also Read - ना Nude हुई ना किसी के साथ सोई, रॉकस्टार की एक्ट्रेस नरगिस फाकरी ने बताया-क्या हुआ इसका अंजाम

रक्षा मंत्रालय द्वारा दायर की गई याचिका में प्रतिवादियों को प्रसारण, टेलीकास्टिंग, सिनेमाघरों या किसी भी अन्य डिजिटल/ओटीटी मंच पर किसी भी तरीके से फिल्म पर रोक लगाने की गुहार लगाई थी.

याचिका में कहा गया था कि फिल्म भारतीय वायु सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाती है और साथ ही फिल्म के लिए एनओसी न लेने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं, जो एक सामान्य प्रक्रिया है.

याचिका में नेटफ्लिक्स सहित सभी ओटीटी प्लेटफार्मो से फिल्म या इसके किसी भी भाग व दृश्य को हटाने के लिए अदालत के निर्देशों की भी मांग की गई थी.

याचिका में कहा गया है, “भारतीय वायुसेना हमेशा से लैंगिक समानता में विश्वास करती है और वह अपने सभी अधिकारियों के लिए हमेशा स्वस्थ काम का माहौल सुनिश्चित करती है.” याचिका में कहा गया है कि वायुसेना लिंग, जाति, क्षेत्र, धर्म इत्यादि से प्रभावित नहीं होती.

याचिका में कहा गया है कि भारतीय वायुसेना की सेवा में कई महिला अधिकारी शामिल हैं, जो हमारे देश की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं का हिस्सा बनकर सक्रिय रूप से मुकाबला करती हैं और सहायक भूमिकाओं में भाग ले रही हैं.

सुनवाई के दौरान, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) संजय जैन ने केंद्र सरकार और भारतीय वायुसेना के लिए अपील करते हुए कहा कि फिल्म को प्रीव्यू कमेटी को नहीं दिखाया गया है और न ही भारतीय वायुसेना से इसके संबंध में कोई एनओसी ली गई है.

उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने की सामान्य प्रक्रिया का पालन भी नहीं हुआ है. एएसजी ने कहा, “यह एक सामान्य मानहानि मामले की तुलना में गंभीर है. यह भारतीय सुरक्षाबलों का सवाल है. भारतीय वायुसेना के लिए हर दिन मानहानि और हतोत्साहित करने वाली चीजें हो रही हैं.”

इस बीच, हाईकोर्ट की एक अलग पीठ ने पिछले सप्ताह अधिकारियों को फिल्म के खिलाफ याचिका पर संज्ञान लेने का निर्देश दिया था, जिसमें फिल्म की स्ट्रीमिंग पर रोक लगाने का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि यह भारतीय वायुसेना की नकारात्मक छवि को चित्रित कर रही है.

बता दें कि फिल्म भारतीय वायुसेना की अधिकारी गुंजन सक्सेना की जिंदगी पर आधारित है, जो 1999 के कारगिल युद्ध की पहली महिला फाइटर पायलट थीं. फिल्म में गुंजन सक्सेना का किरदार जाह्न्वी कपूर ने निभाया है और इस फिल्म का निर्माण धर्मा प्रोडक्शन ने किया है.