दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को फिल्म ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ की रिलीज पर रोक लगाने की मांग वाली एक याचिका को खारिज कर दिया.मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति अनूप जयराम भमभानी की पीठ ने वकील सुजीत कुमार सिंह द्वारा दाखिल याचिका को खारिज कर दिया.फिल्म 12 अप्रैल को रिलीज होनी है.इस याचिका में ‘फिल्म निर्माताओं द्वारा आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के खिलाफ’ निर्वाचन आयोग को कार्रवाई के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी.इसमें लोकसभा चुनाव के परिणामों की घोषणा होने तक फिल्म के रिलीज के स्थगन की की मांग की गई थी.Also Read - JAC Jharkhand Board 12th Result 2021 Declared: हैवी ट्रैफिक के कारण JAC 12वीं रिजल्ट देखने में है दिक्कत, तो ऐसे करें चेक

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याचिकाकर्ता ने कहा था कि यह फिल्म एक ऐसे राजनेता के बारे में है, जो खुद आगामी लोकसभा चुनाव लड़ने जा रहा है. यह निश्चित तौर पर उसकी चुनावी संभावनाओं को अनुचित फायदा पहुंचाएगी.उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष के उम्मीदवारों पर इस फिल्म से नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. बता दें, फिल्म को लेकर कांग्रेस ने भी निर्वाचन आयोग से आग्रह किया कि वह बायोपिक ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ को रिलीज की अनुमति न दे. कांग्रेस ने कहा कि इसका राजनीतिक उद्देश्य है और भाजपा को इसके जरिए लोकसभा चुनाव में अतिरिक्त लाभ लेना है. Also Read - Panthers: अब होगा राजीव गांधी के जहाज के अपहरण का खुलासा, हर एपिसोड में होगी रॉ एजेंटों की कहानी

कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने भी निर्वाचन आयोग से कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर एक बायोपिक पांच अप्रैल को रिलीज होने वाली है, और इसका उद्देश्य चुनाव में कुछ अतिरिक्त लाभ हासिल करना है.
Vivek Oberoi for Narendra Modi biopic

सिब्बल ने कहा था, “हम मानते हैं कि यह न सिर्फ एक भ्रष्ट आचरण है, बल्कि फिल्म की रिलीज खास उद्देश्य से प्रेरित है. फिल्म के तीनों निर्माता भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए हैं. अभिनेता विवेक ओबेराय भी भाजपा से हैं.”

विवेक ओबेराय ने फिल्म में नरेंद्र मोदी का किरदार निभाया है.

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उन्होंने कहा था, “यह कोई कलात्मक फिल्म नहीं, बल्कि राजनीतिक है. हमने निर्वाचन आयोग से यही कहा है कि इसे रिलीज करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए. यह संविधान के अनुच्छेद 324 का उल्लंघन है. यह केबल नेटवर्क नियमों का भी उल्लंघन है और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 126 का भी उल्लंघन है.

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