सपने देखना और सपने के पूरे हो जाने के बीच का पड़ाव जाह्नवी कपूर के लिए बहुत रोमांचक था. बचपन से ही तमन्ना थी फिल्म एक्ट्रेस बनने की. मां (श्रीदेवी) एक मंझी हुई अभिनेत्री, पिता (बोनी कपूर) हिंदी सिनेमा के नामी निर्देशक और प्रोड्सयूर. फिर चिंता किस बात की थी. कभी भी किसी भी फिल्म के जरिए मम्मी-पापा लॉन्च कर देते? लेकिन जाह्नवी को चिंता थी कि कोई ये न कहे कि फिल्मी बैकग्राउंड और पैसों की वजह से फिल्मों में आ गई. वो प्रूव करना चाहती थीं कि वे अपनी काबिलियत के दम पर आईं हैं और इसी दम पर टिकी भी रहना चाहती हैं. धर्मा प्रोडक्शन की फिल्म ‘धड़क’ उनके लिए एक सपने जैसी थी.

फिल्म प्रमोशन के दौरान जाह्नवी कपूर ने इंडिया.कॉम से अपनी शूटिंग के पहले दिन के बारे में बात करते बताया कि ‘धड़क’ बस एक फिल्म नहीं एक सपना है उनके लिए. उस दिन जब जाह्नवी शूटिंग के लिए जा रही थीं तो उनका दिल तेजी से धड़क रहा था. वो  बहुत नर्वस थी. बैचेनी थी. लंबी-लंबी सांसे ले रही थीं. सोच रही थी पता नहीं क्या होगा?? कैसे होगा??? पहली फिल्म…राजस्थानी भाषा.. एक जिम्मेदारी सी थी क्योंकि मराठी फिल्म ‘सैराट’ को बहुत पसंद किया गया था. ऐसे में दर्शकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का दबाव…..जाह्नवी ने कहा, सच कहूं तो डर लग रहा था. लेकिन जब मैं सेट पर पहुंची तो फिल्म के डायरेक्टर शंशाक ने घर जैसा माहौल बना रखा था. हम लोग बस सेट पर खेलते थे. मस्ती करते थे. कई बार तो टेंशन होने लगती थी कि काम भी हो रहा है या सिर्फ मस्ती ही हो रही है.

बता दें, अब जब जाह्नवी का सपना सच होने जा रहा है तो ये देखने के लिए उनकी मां श्रीदेवी इस दुनिया में नहीं है. मीठी आवाज़ और मासूम से चेहरे वाली जाह्नवी बस चाहती है कि उनकी मां की तरह उन्हें भी लोगों का प्यार मिले. उन्होंने इस फिल्म के लिए बहुत मेहनत की है, इसलिए जाह्नवी चाहती हैं कि एक आम कलाकार की तरह दर्शक उन्हें स्वीकार करें और अपना प्यार और स्नेह दें. फिल्म की बात करे तो ‘धड़क’ डॉयरेक्टर नागराज मंजुले की मराठी फिल्म ‘सैराट’ का हिन्दी रिमेक है. डॉयरेक्टर शशांक खैतान की इस फिल्म को करण जौहर और नीरु जौहर ने प्रोड्यूस किया है. फिल्म रिलीज होने में महज कुछ ही घंटे बाकी हैं ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि ‘धड़क’ लोगों के दिलों को कितना धड़का देने वाली है.

 

बॉलीवुड और मनोरंजन जगत की ताजा ख़बरें जानने के लिए जुड़े रहें  India.com के साथ.