
Pooja Batra
पत्रकारिता में 17 साल से अधिक का अनुभव. भारतीय विद्या भवन में अध्यापन से करियर की शुरूआत. इसके बाद कई प्रोडेक्शन हाउस में काम किया. एंटरटेनमेंट, सक्सेस स्टोरीज़ प्रोग्राम. ग्राफिक्स. ... और पढ़ें
साल 1975. फिल्म का नाम शोले. जब रिलीज़ हुई तो डायरेक्टर रमेश सिप्पी को उम्मीद थी कि ये फिल्म छप्पर फाड़ देगी. लेकिन जब रिलीज़ हुई तो सिनेमाघर बिल्कुल खाली. मेकर्स सदमें में आ गए. क्रिटिक्स ने इसे फ्लॉप करार दे दिया. रमेश सिप्पी का माथा ठनक गया. उन्होंने इस फिल्म को बनाने में खून पसीना बहा दिया था. उन्होंने सोच लिया कुछ भी हो इस फिल्म को कैसे भी चलाना है. चाहे इसका क्लाईमेक्स क्यूं न चेंज करना पड़े. डायरेक्टर फिल्म का एंड री-शूट करने के लिए तैयार हो गए. वो चाहते थे किसी भी कीमत पर ये फिल्म चले. लेकिन वक्त ने पलटी मारी. जब फिल्म के गाने ‘कोई हसीना जब रूठ जाती है’, ‘जब तक है जान’ बजने लगे तो लोगों का रूझान भी बढ़ने लगा. फिर अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, हेमा मालिनी, संजीव कुमार स्टारर फिल्म शोले भारतीय सिनेमा की सबसे यादगार और आइकॉनिक फिल्मों में से एक बन गई.

शोले की फिल्म टिकट वायरल
फिल्म शोले ने भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में एक नया इतिहास रच दिया. हाल ही में इसकी टिकट सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसमें उस दौर की टिकट की कीमत को लेकर काफी चर्चा हुई. 1975 में सिनेमाघरों में टिकट की कीमतें बहुत कम हुआ करती थीं.
बैक स्टॉल: 1.50 से 2.00 रुपए
मिडल स्टॉल: 2.50 रुपए
बालकनी (सबसे महंगी): 3 रुपए
फिल्म बनाने में कितना आया था खर्चा?
उस वक्त इस फिल्म को बनाने में 3 करोड़ रुपए खर्च हुए थे. इसमें से 20 लाख रुपए सिप्पी ने कास्टिंग पर खर्च किए थे. एक इंटरव्यू के दौरान सिप्पी ने कहा था कि वे किस्मत वाले थे कि शोले की मेकिंग के दौरान उनके पिता जी.पी. सिप्पी उनके साथ थे. सिप्पी ने यह भी कहा था कि अगर वे आज ‘शोले’ बनाते तो इसका बजट 150 करोड़ रुपए होता और 100 करोड़ रुपए स्टारकास्ट पर ही खर्च हो गए होते.
शोले के बारे में खास बातें
-शोले ने उस समय बॉक्स ऑफिस पर करीब RS 35 करोड़ की कमाई की थी, जो आज के हिसाब से 1500 करोड़ से अधिक होती.
-यह फिल्म लगातार 5 वर्षों तक सिनेमाघरों में चलती रही.
-मुंबई के मिनर्वा थिएटर में इसे करीब 286 हफ्तों तक चलाया गया, जो एक रिकॉर्ड है.
-रमेश सिप्पी ने फिल्म की शूटिंग में असली गोलियों का यूज़ किया था. जब धर्मेंद्र और अमिताभ का शूट चल रहा था उस दौरान धर्मेंद्र ने असली गोलियां चलाई जोकि अमिताभ के कान को छू कर निकल गई और एक बड़ा हादसा होते-होते बचा.
-हेमा मालिनी के साथ रोमांटिक सीन करते वक्त धर्मेंद्र जानबूझ गलतियां करते थे ताकि सीन को दोबारा शूट करना पड़े.
-फिल्म की शूटिंग मुख्य रूप से रामनगर (कर्नाटक) में की गई थी.
-रामनगर को अब “शोले हिल्स” के नाम से जाना जाता है.
-गब्बर सिंह का किरदार बागी डाकू गब्बर सिंह गुर्जर से प्रेरित था, जो 1950 के दशक में चंबल घाटी में सक्रिय था.
मशहूर डायलॉग
लोग आज भी फिल्म के ये डायलॉग बोलते हैं
“कितने आदमी थे?”
“जो डर गया, समझो मर गया.”
“बसंती, इन कुत्तों के सामने मत नाचना.”
“ये हाथ हमें दे दे ठाकुर.”
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