बॉलीवुड अभिनेत्री दिव्या दत्ता का कहना है कि बच्चों को अपने दैनिक जीवन से तनाव और दबाव से दूर रखना चाहिए. यूनीसेफ और बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाली गैर सरकारी संस्था CRY (child rights and you) फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक सेमिनार में दिव्या फिल्मकार अमोल गुप्ते के साथ आई थीं.Also Read - Divya Dutta ने बताया मां का वो दर्दनाक हादसा, अभी तक भूल नहीं पाई है...

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दिव्या ने कहा, “बच्चों को उनका बचपना लौटाने की जरूरत है. वे अगर फिल्मों और कार्यक्रमों की शूटिग के दौरान सेट पर हैं, हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी शिक्षा, नींद और पुनर्निर्माण से कोई समझौता न हो. इसके लिए हम सबकों कदम उठाने होंगे.” उन्होंने कहा, “उनसे उनका बचपना न छीनें. एक सुंदर संतुलन ही मंत्र है.” Also Read - 'वीर जारा' से लेकर 'बदलापुर' तक, दिव्या दत्ता की वो 6 फिल्में जिन्होंने उनके करियर का बदल दिया ग्राफ

उन्होंने सेट पर बच्चों पर नजर रखने के लिए वहां परामर्शदाताओं को रखने की सलाह दी. इस दौरान रिएलिटी शो के दौरान बाल कलाकारों के मानसिक स्वास्थ्य का भी मुद्दा उठाया गया. हाल ही में अभिनेत्री दिव्या दत्ता ने कहा था कि वह दिग्गज फिल्मकार एवं गीतकार गुलजार के निर्देशन में काम करना चाहती हैं.

उन्होंने कहा, ऐसे कई किरदार हैं, जिन्हें मैं निभाना चाहती हूं. मैंने गुलजार साहब द्वारा निर्देशित सभी फिल्में देखी हैं और यह मेरी इच्छा है कि जब भी वह कोई फिल्म निर्देशित करें, मैं उसका हिस्सा बनूं क्योंकि मैं उनकी फिल्म निर्माण की शैली को सच में बहुत पसंद करती हूं.

अभिनेत्री ने कहा, मैं वास्तव में उनकी फिल्मों ‘मौसम’ (1975) और ‘आंधी’ (1975) को पसंद करती हूं, तो मैं उन फिल्मों को करना पसंद करूंगी और उनके (गुलजार के) अलावा, ऐसे कई निर्देशक हैं, जिनके साथ मैंने अभी तक काम नहीं किया है..पसंदीदा निर्देशकों की आधी सूची अभी बाकी है.

दिव्या की आने वाली फिल्मों में ‘मंटो’, ‘फन्ने खां’, ‘अभी तो पार्टी शुरू हुई है’ और ‘नास्तिक’ जैसी फिल्में शामिल हैं.