सुभाष घई की फिल्म ‘सौदागर’ से अपने करियर की शुरुआत करने वाली अभिनेत्री मनीषा कोइराला को 2012 में कैंसर हो गया था. इसके बाद मनीषा फिल्मी दुनिया से दूर हो गई थीं. अब मनीषा पूरी तरह से ठीक हो गई हैं और डियर माया से फिर बड़े पर्दे पर वापसी कर रही हैं.

-मनीषा से जब सवाल किया गया कि 2 जून को रिलीज होने वाली इस फिल्म को करने के पीछे खास वजह क्या थी, कहीं ऐसा तो नहीं ये आपकी निजी जिंदगी से कहीं न कहीं मेल खाती है?

मनीषा ने कहा, डियर जिंदगी की कहानी मुझे बहुत बेहतरीन लगी. डॉयरेक्टर सुनैना भटनागर ने माया किरदार के साथ पूरा न्याय किया है. फिल्म, मेरी जिंदगी से मिलती जुलती नहीं है ये एक ऐसी महिला की कहानी है जो जिंदगी को ‘हां’ कहना सीखती है बस यही सकारात्मक सोच मुझे बहुत पसंद आई. और मैंने फिल्म के लिए ‘हां’ कह दिया. वैसे भी हर एक्टर एक अच्छा रोल पाने का ‘भूखा’ होता है. मैंने भी वही किया.

– ‘माया’ के बारे में कुछ बताइए?
माया एक ऐसी बूढ़ी महिला की कहानी है जो जिंदगी से रुठ जाती है या फिर यूं कहें कि जिंदगी उससे रुठ जाती है. वो
नाराज होकर खुद को एक घर में कैद कर लेती है. लेकिन तभी उसे एक लव लैटर मिलता है जिससे उसकी जिंदगी ही
बदल जाती है. देखिए फिल्म का ट्रेलर-

-जिंदगी में जैसा हम चाहते हैं अगर वैसा हो तो बहुत अच्छा हो, लेकिन अगर वैसा न हो तो क्या करना चाहिए?
मुस्कुराते हुए मनीषा कहती हैं मुझे आपको ये प्रश्न काफी अच्छा लगा. जिंदगी बहुत खूबसूरत है. कई बार हमारे साथ ऐसा कुछ होता है जिसे हम सोच भी नहीं सकते. लेकिन हमें उस वक्त को एक लर्निंग लैसन के रुप में लेना चाहिए. उससे आगे आने वाले वक्त के लिए सीख लेनी चाहिए. जिससे हम जिंदगी को बेहतर बना पाएं. और ऐसा हर किसी की जिंदगी में होता है. एक वक्त आता है जब हम हताश या निराश हो जाते हैं. लेकिन यही वक्त हमें उस स्थिति से उबरना भी सीखाता है. और स्ट्रांग बनाता है.

-एक मुश्किल दौर से आप गुजरी हैं और काफी सालों के बाद डियर माया के जरिए आपने कमबैक किया है. क्या अंतर महसूस किया है रील लाइफ और रियल लाइफ में?
देखिए परिस्थितियों पर किसी का कोई कंट्रोल नहीं होता. लेकिन जब आप उसे स्वीकार कर लेते हैं तब कोई दिक्कत नहीं होती. फिर तो ये होता है अच्छा कोई बात नहीं जो होगा देखा जाएगा. हमें जिंदगी की चुनौतियों से भागना नहीं चाहिए नहीं तो वो आपको और डराएंगी. जब हम उसका सामना करना सीख जाएंगे तो जिंदगी बहुत आसान हो जाएगी. मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ. और जहां तक रील लाइफ की बात है. एक्टिंग मेरा पैशन है. फिल्में तो मुझे करनी ही थीं. ये मेरी जिंदगी का हिस्सा है.दोबारा काम शुरू करने में थोड़ी नर्वस थी.. कैसी दिखूंगी.. लोग पसंद करेंगे या नहीं. झिझक थी.. लेकिन खुशी है कि ट्रेलर को पसंद किया जा रहा है.

-फिल्म का ट्रेलर देखकर लगता है इसमें कहीं न कहीं एक महिला की उदासी और डिप्रेशन छिपा है. उन लोगों के लिए आपका क्या संदेश है जो ऐसी स्थिति में रहते हैं?
पूरी फिल्म डिप्रेशन पर आधारित नहीं है. हां, लेकिन हमने उसका काफी हिस्सा छुआ है. मैं नौजवानों से ये कहना चाहूंगी कि अगर आप किसी को ऐसी स्थिति से गुजरते देखते हैं तो उसे प्यार के जरिए उबारने में मदद करें. क्योंकि जिंदगी में ऐसी कोई भी चीज नहीं है जिसे क्योर नहीं किया जा सकता.

– कोई एक खास बात जिसने आपको मोटिवेट किया?
हम जिंदा क्यों हैं? हां, मैंने बुरे वक्त से निकलने के बाद यही सोचा कि मैं जिंदा क्यों हूं. शायद यही वजह काफी है मेरे आगे बढ़ने के लिए.  हमें सोचना चाहिए कि हम जिंदा क्यों हैं. क्योंकि हमें कुछ करना है. भगवान ने हर किसी को कुछ न कुछ करने के लिए बनाया गया है. देखो, जिंदगी बहुत छोटी है. भगवान की दी हुई है. फ्री में मिली है. इसलिए हम इसकी कद्र नहीं करते. जिस दिन हम इसकी कद्र करना सीख जाएंगे. उसे जीना सीख जाएंगे. तो देखना ये कितनी हसीन लगेगी. इसे जी लो यार, न जाने कल क्या हो. इस दुनिया को अलविदा कहने से पहले इसका आनंद तो लेकर जाओ.