शक्रवार को रिलीज होने वाली फिल्म ‘फुल्लू’ में मुख्य किरदार निभा रहे एक्टर शारिब हाशमी से इंडिया.कॉम की विशेष बातचीत.Also Read - Exclusive ! "काव्य एक शानदार अदाकारा हैं", भेजा फ्राई फेम विनय पाठक ने खोले और भी कई राज़: Watch

-फिल्म फुल्लू  में अपने किरदार के बारे में बताइए? Also Read - Chitrashi Rawat's Exclusive Interview : चित्राशी ने किआ शाहरुख खान के साथ अपनी बेस्ट मेमोरीज को रिवील ! Watch

फिल्म में मेरा किरदार एक आम आदमी फुल्लू का है. जो थोड़ा भोला है. मासूम है. लोगों को हंसाता है, रुलाता है. इसे औरतों के संग रहना काफी पसंद है. वो हमेशा सबसे हंसी-ठिठोली करता हुआ नजर आता है. औरतों की मदद करता है. दुकान से फ्री में सामान लाकर देता है. दूसरों से अलग सोच रखता है. जो औरतों के दर्द को समझता है. मतलब गांव का एक सीधा- साधा आदमी है. जब उसे औरतों के मासिक धर्म या पीरियड के बारे में पता चलता है तो उससे होने वाली परेशानियों के बारे में जानकर वो बैचेन हो जाता है. और फिर यहीं से शुरु होती है फिल्म की असली कहानी. जिसे देखने के लिए आपको थियेटर में जाना पड़ेगा. कहानी बिल्कुल अलग और दिलचस्प है इसका मैं भरोसा दिलाता हूं. दर्शक पसंद करेंगे. Also Read - शबाना रजा है मनोज बाजपेयी की पत्नी का असली नाम, मजबूरी में बन गई थीं नेहा, बताई वजह

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-फिल्म एक ऐसे विषय के बारे में है जिस पर आज भी लोग बात करने से हिचकते हैं. जब ये स्क्रिप्ट आपके पास आई तो सबसे पहले क्या ख्याल आया?

जो लोग पीरियड और मासिक धर्म के बारे में बात करने से कतराते हैं. ये फिल्म उन्हीं के बारे में है. मैं भी उन लोगों में शामिल हूं. अगर खुद के अनुभव के बारे में बात करूं तो जब मेरी पत्नी ने पहली बार मुझे पैड लेने के लिए दुकान पर भेजा, तो मुझे वो दो शब्द ‘सेनेटरी पैड’ बोलने के लिए काफी हिम्मत जुटानी पड़ी. जब मेरे पास इस फिल्म का ऑफर आया तो मुझे इसका विषय काफी अलग लगा. मेरी पत्नी ने भी स्क्रिप्ट पढ़ी उन्हें भी काफी अच्छी लगी. तब मैंने फैसला कर लिया इस फिल्म को तो करना ही है. फिल्म के बारें में आगे बात करने से पहले देखिए फिल्म का ट्रेलर

-फिल्म की शूटिंग मथुरा के छोटे से गांव में हुई है. वहां की औरतें सेनेटरी नैपकीन के बारे में कितना जानती थी?

वहां की औरतों को तो ये ही नहीं पता कि सेनेटरी नैपकीन होता क्या है. शूट करते हुए जब वहां के लोग हमें देखते थे तो हंसने लगते थे. कई तो समझ ही नहीं पाते थे कि आखिर हो क्या रहा है. लेकिन उन्होंने हमें वहां काफी सहयोग दिया. और जितना हमसे संभव हो पाया, शूटिंग के दौरान हमने भी लोगों को इस विषय के बारे में समझाने की कोशिश की.

-आपकी फिल्म की टैगलाइन है ‘ जो औरत का दर्द नहीं समझता, भगवान उसे मर्द नहीं समझता’ एक मर्द होने के नाते आप कितना औरत के दर्द को समझ पाएं हैं?

समझने की कोशिश करता हूं, कितना समझ पाता हूं ये तो नहीं पता. इस फिल्म के दौरान मैंने इस विषय को काफी करीब से समझा है. अब समझ में आता है कि मेरी मां और बहनों को किस कदर परेशानियों का सामना करना पड़ता होगा. मैं चाहता हूं कि महिलाएं खुद भी अब इस विषय पर खुल कर बात करे. सामने आएं. क्योंकि ये कोई बीमारी नहीं है.

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-मासिक धर्म के बारे में महिलाओं के साथ पुरुषों को जानना कितना जरूरी है?
सच बताऊं तो उतना ही जरुरी है जितना की एक लड़की को जानना. मुझे कॉलेज के दौरान अपनी गर्लफ्रेंड से पता चला था. उससे पहले तो मुझे इस बारे में बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था. हर महीने महिलाओं को पीरियड होता है. ये एक आम बात है. इसपर खुलकर बात होनी चाहिए. देशभर में महिलाओं को इस पर जागरुक किया जाना चाहिए. और जहां तक सेनेटरी नैपकीन की बात है. जिस तरह पसीना आने पर रुमाल का इस्तेमाल करते हैं ठीक उसी तरह पीरियड के दौरान महिलाओं के स्वास्थ्य और हाईजीन को देखते हुए बताना चाहिए ये उनके लिए कितना जरूरी है.  इस जागरुकता अभियान में पुरुष की भागीदारी भी समान रूप से होनी चाहिए.

Photo- youtube

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-इस विषय पर अभिनेता अक्षय कुमार की फिल्म पैडमैन भी बन रही है. आपकी फिल्म कितनी अलग है उससे?
अक्षय कुमार की पूरी फिल्म के बारे में मुझे अभी तो पूरी जानकारी नहीं है. इतना पता है ‘पैडमैन’ अरुणाचल प्रदेश के रहने वाले मुरुगानाथन के जीवन पर आधारित है, जिन्होंने मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन को आम वर्ग की लड़कियों तक पहुंचाया. हमारी फिल्म एक काल्पनिक पात्र पर आधारित है. ‘फुल्लू’ और ‘पैडमैन’ का टॉपिक एक जरूर है लेकिन कहानी बिल्कुल अलग होगी.

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-आजकल कम बजट की फिल्में अच्छे कनसेप्ट पर बन रही हैं. दर्शकों का भी मिजाज बदला है. कितनी उम्मीद है लोग इस फिल्म को पसंद करेंगे?

एक अभिनेता होने के नाते मुझे लगता है 16 जून को रिलीज हो रही ये फिल्म लोगों को फिल्म पसंद आएगी. अलग विषय पर बनी है. हम लोगों से जुड़ी हुई है. हां, ये है कि हमारी फिल्म को ‘ए’ सर्टिफिकेट मिला है जिसकी वजह से फिल्म की पहुंच थोड़ी सिमट गई है. बावजूद इसके हम चाहते हैं ज्यादा से ज्यादा लोग इस फिल्म को देखें और पसंद करें. क्योंकी इसमें सिर्फ एक फिल्मी कहानी ही नहीं एक अच्छा मैसेज भी है.