स्वरा अपनी बात को बेबाकी से रखने के लिए मशहूर है। उनकी चर्चित फिल्म ‘अनारकली ऑफ आरा’ जल्द ही रिलीज होने वाली है। फिल्म में भी स्वरा दमदार रोल में है। यकीन मानिए जिन अनारकली के किस्से आपने सुने होंगे या अपने मोबाइल में छुपकर उनके नाच भी देखे होंगे, स्वरा ऐसी चमकीली कपड़ों में लिपटी….नाचती ठुमकती…अपने ऊपर लुटाए हुए नोट गिनती ‘नचनिया’ लड़की के अंदर छिपे दर्द की कहानी है। स्वरा ने बताया, इस फिल्म में काम करने के लिए उन्होंने कितनी मेहनत की। सारे कपड़े खुद खरीदे। आरा की छोटी-छोटी दुकानों और रेड़ियों से 100 रुपए की साड़िया खरीदीं। गाल रंगे। लाउड मेकअप किया ताकि आप असल में अनारकली को महसूस कर पाएं।

स्वरा ने बताया, फिल्म का टाइटल सुनते ही मैंने तय कर लिया था, मुझे ये फिल्म करनी है। जब आप इस बारे में बात कर ही रहे हैं तो इससे जुड़ा एक किस्सा आपको बता दूं, फिल्म के डायरेक्टर अविनाश दास मुझसे एक पार्टी में मिले और मुझसे अनारकली का जिक्र किया। जब मैंने दास से इस किरदार के बारे में सुना तो मुझे सपने आने लगे की मैं ही ये फिल्म कर रही हूं। मुझे ऑस्कर मिल रहा है। लोग वाह-वाही कर रहे हैं। लेकिन मुझे तब सदमा लगा जब दास ने मुझसे ही पूछा कि इस फिल्म के लिए किसी हीरोईन का नाम बताओ। करीबन दो साल के बाद अविनाश फिर मेरे पास आए। तब भी उन्होंने मुझे सीधे तौर पर फिल्म करने का ऑफर नहीं दिया बल्कि ये कहा, तुमने इतनी बार स्क्रिप्ट को पढ़ लिया है तो तुम्हीं ये फिल्म भी कर लो। खैर, अवार्ड मिले न मिले लेकिन मेरे लिए ये बेहतरीन फिल्म है।

हमने जब स्वरा से पूछा कि महिलाओं पर कटाक्ष करना बहुत ही आसान होता है। आप हमेशा ही महिला सशक्तिकरण के बारे में बात करती आईं है। कितना जरूरी है आज के दौर में इस बारे में चर्चा करना।

बहुत जरूरी है, अभी भी नहीं करेंगी तो कब करेंगी। मैं तो कहती हूं बेशर्म हो जाओ। जिद्ध करो। लड़ो। विरोध करो। कुछ पसंद नहीं है तो बोलो ना। चुपचाप सहने की क्या जरूरत है। एक जमाने में हमें बताया जाता था कि सहना ही नारी की असली शक्ति है। मेरा मानना है औरतों ने बहुत सहन कर लिया है। अब थोड़ा अपने बारे में भी सोचना शुरु करो। ओह…आह ये कैसे होगा…वो कैसे होगा..इसे छोड़ो यार! अब आगे बढ़ो।

स्ट्रीट सिंगर बनी स्वरा ने बताया, ये फिल्म करने के बाद मुझे अहसास हुआ कि असल में ऐसी लड़कियों की जिंदगी क्या होती होगी। अभी कुछ वक्त पहले हरियाणा में एक डांसर को गोली मार दी गई थी, बेहद दर्दनाक घटना थी। आरा में जहां मैंने एक मुन्नी आर्केस्ट्रा पार्टी से ट्रेनिंग ली उसने बड़े ही आराम से बताया कि इस तरह के कार्यक्रमों में दो-तीन लड़कियां तो मर ही जाती हैं। इसे सुनकर मेरा तो सिर ही चकरा गया। हम भी तो कलाकार ही हैं। हमारे साथ अगर सेट पर ऐसा हादसा हो तो ये एक बहुत बड़ी चीज होगी। वो जो दुनिया है बिल्कुल ही अलग है। स्टेज पर कितनी भी लड़किया दबंग क्यों न लगे…अश्लील गाने गाएं…है तो वो लड़की ही ना। एक पुरुष प्रधान समाज में कितना मुश्किल है इस जिंदगी को जीना, फिल्म के बाद ये मुझे समझ में आया। और एक बात, वो लोग जो भी हैं, कलाकार हैं। मुझे नहीं लगता कि उनका इस तरह से अपमान करना चाहिए।

‘अनालकली क्या है??? एक गुस्सा है। एक अन्याय है जो कि गलत है। अनारकली भी जिद्दी है…मैं भी जिद्दी हूं..अनारकली गलत के लिए लड़ती है मैं भी लड़ती हूं। अनारकली गालियां निकालती है मैं भी अब गालियां निकालना सीख गई हूं। “हम पैसा भी रखेंगे… और देंगे भी नहीं..पिछवाड़े में दम है तो लेके दिखा दीजिए..बाकि कुत्ते आप हैं…भौकते रहिए”. कुल मिलाकर ये है कि अनारकली मेरे दिल के काफी करीब है।’

अनारकली के किरदार के बारे में जिक्र करते हुए स्वरा ने कहा, मैंने अनारकली के किरदार को बचपन से लेकर बड़े होने तक जीया है। हम लोग शर्म की बात करते हैं। अश्लीलता की बात करते हैं। हमारे देश की जनसंख्या 1.25 करोड़ ऐसे ही हो गई है क्या??? हम दोगलापन दिखाते हैं। सेक्स करते हैं लेकिन उसके बारे में बात करने से घबराते हैं। भारत को वही देश है न, जहां कामसूत्र लिखा गया है। सेक्स की बातें तब गलत होती हैं जब आप नाबालिग हों या कोई आपसे जबरदस्ती इस विषय पर बात करने की कोशिश कर रहा हो। अगर दो समझदार लोग इस पर बात कर रहे हैं तो शर्म कैसी और नुकसान कैसा। सेक्स पर बात करने से ज्यादा गुनाह तो दंगे करना करवाना है ना।

जब हमने स्वरा से सवाल किया कि एक आम लड़की के लिए सपने देखना इतना बड़ा गुनाह है कि जिसे देखो वही फायदा उठाने की कोशिश में लगा रहता है, बात फिर चाहे कास्टिंग काउच के बारे में ही क्यों न हो। स्वरा ने जवाब में कहा, वो सपने ही क्या जो बेमन किसी काम को करने में मजबूर कर दें। अगर कोई आपको काम करवाने की लालच में शोषण कर रहा है तो मत करिए , किसने कहा है करने के लिए।

सेंसर बोर्ड के सीन काटने के सवाल पर स्वरा ने भड़कते हुए कहा, सेंसर का काम सिर्फ सर्टिफाई करना है किसी फिल्म को रोकना नहीं। अगर एक 18 साल का लड़का घूम सकता है, शादी कर सकता है, सेक्स कर सकता है, बच्चे पैदा कर सकता है तो फिल्म  भी देख सकता है। सेंसर को इसमें अपना दिमाग नहीं घुसाना चाहिए।