एफटीआईआई के चेयरमैन डा. गजेंद्र सिंह का 3 मार्च 2017 को संस्था में आखिरी दिन है। गजेंद्र का कार्यकाल कैसा रहा ये जानने के लिए इंडिया.कॉम ने वहां के छात्र हरिशंकर नचिमुथु से विशेष बातचीत की। Also Read - VIDEO: महाराष्ट्र में ABVP कार्यकर्ताओं ने मंत्री के काफिले को रोका, पुलिस ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा

नचिमुथु ने बताया, हमें तो उनसे बिल्कुल भी खुशी नहीं है। हमने इस बात का विरोध भी किया था कि अगर एक समझदार और अनुभवी आदमी को चेयरमेन की जिम्मेदारी सौंपी जाती तो अच्छा रहता। संस्था के लिए भी और वहां के विद्यार्थियों के लिए भी। Also Read - ABVP फीस बढ़ाने के सरकार के फैसले के विरोध में उतरा, कहा- ये अमानवीयता है, निर्णय तुरंत वापस हो

सरकार तो अपना मर्जी का व्यक्ति ले आती है। जो व्यक्ति एंटी स्टूडेंट पॉलिसी लाएगा अपना एजेंडा स्टूडेंट्स पर थोपेगा तो वो क्या काम करेगा। चुप होकर बैठा रहेगा। गजेंद्र जी को तो पॉलिटिकल माइलेज भी मिल गया। सरकार का भी अहंकार पूरा हो गया। उसे तो गजेंद्र में अपनी जीत नजर आएगी। सरकार ने उनको बचाने के लिए दुनिया भर का पैसा भी खर्च किया। Also Read - एबीवीपी ने पीएम मोदी को भेजा 26 सूत्री ज्ञापन, कहा- गरीब छात्रों की एक साल की फीस हो माफ  

कॉलेज की जितनी भी मीटिंग होती है वो मुंबई में होती है। यहां से बस में भर कर टीचर्स को वहां ले जाया जाता है। मीटिंग होती है। आना-जाना, खाना खिलाना सब सरकार का ही तो खर्चा होता है। फिर गजेंद्र का जब कभी यहां आना होता है तो वे पुलिस प्रोटेक्शन के साथ आते हैं, ये तो वही बात हो जाती है ना जैसे अपने घर जाने के लिए आपको पुलिस को लेकर जाना पड़े।

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क्या फायदा इस चीज का।और फिर सबसे बड़ी बात है कि कुछ काम तो करो। आना है नहीं, काम करना नहीं है। सुधार की बात तो छोड़ ही दो। हम लोग तो इसका विरोध हमेशा करते ही रहेंगे।

एक ऐसे व्यक्ति को सरकार ने संस्था का चेयरमेन बना दिया जिसे कुछ आता ही नहीं है। कुछ काम भी तो करते वो भी नहीं। खुद ही एक्सपोज हो गए। देख लिया ना लोगों ने कि उन्होंने क्या काम किया। अब कुछ भी बोलने की जरूरत ही नहीं है। मीडिया खुद ही पूछ ले उनसे संस्था के लिए क्या काम किया है कुछ बोल ही नहीं पाएंगे वो। सिर्फ फोटो खिंचवाकर सोशल साइट पर डालने से कुछ होता नहीं है ना। वो तो सब कोई करता है।

ना वो कभी स्टूडेंट्स के साथ बैठे…न कभी बात की। न उनको सेलेब्स का पता। बस सब चल रहा है भगवान भरोसे। इस सरकार से तो कोई उम्मीद नहीं है। अब अगर विरोध करो…कुछ बोलो तो लोग एंटी नेशनल कह देते हैं। अब दिल्ली में जो एबीवीपी कर रही है वो सही है क्या???अब क्या बोला जाए। चल रहा है सब।

आपको बता दें अभिनेता गजेंद्र चौहान को 2015 में देश के शीर्ष फिल्म संस्थान एफटीआईआई का चेयरमेन बनाया गया था जिसका छात्रों ने काफी विरोध किया था।