बिहार की उभरती भोजपुरी लोकगायिका 17 वर्षीया तीस्ता शांडिल्य ने मंगलवार को इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया. उनके निधन से पूरी इंडस्ट्री में शोक की लहर है.  तीस्ता ने पटना एम्स में मंगलवार की शाम करीब साढ़े सात बजे दम तोड़ा. वैसे तो उन्हें मामूली बुखार था पर धीरे-धीरे उनकी तबियत बिगड़ती गई. वो एक्यूट सेप्टेसेमिया नामक रोग से लड़ते-लड़ते आखिरकार हार गई. एम्स के डॉक्टर्स और तीस्ता के पिता उदय नारायण सिंह ने उन्हें बचाने के लिए जी-जान लगा दी. लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था. तीन दिन जिंदगी से संधर्ष के बाद वो हार गईं. यूं तो तीस्ता ने कभी हारना नहीं सीखा था. अपने हर संघर्ष को उन्होंने गीत बना लिया था. लेकिन इस बार उनकी किस्मत में कुछ और ही लिखा था. Also Read - Rishi Kapoor Dies at 67 Live: राजनेताओं ने जताया दुख, कहा- लोगों को आएगी आपकी याद

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भोजपुरी फिल्म जगत से लेकर आम आदमी भी उसकी मदद के लिए आगे आए थे. मशहूर लोक गायिका शारदा सिन्हा ने भी तीस्ता के स्वस्थ होने की कामना की थी.

बहुत अविश्वास के साथ ही लिख पा रहा हूँ कि वह नही है

जनसरोकार के विषयों को उठाने वाले निराला बिदेशिया ने भी तीस्ता के बारे में लिखते हुए कहा-ठीक चार दिन पहले तिस्ता से संवाद हुआ था. दर्द से ध्यान भटकाने के लिए मैं बिल्कुल उसके सिरहाने बैठ गया था. पूछा था मैंने- पहचाना मुझे तिस्ता? दर्द से छटपटाती हुई तिस्ता ने पूरी उर्जा लगाकर खुद को समेटते हुए जवाब दिया-के ना जाने बिदेसिया के? (बिदेसियो को कौन नहीं जानता). तिस्ता ने कहा अब मुझसे ये दर्द बर्दाश्त नहीं होता. ठीक चार दिन पहले तिस्ता के साथ यह आखिरी संवाद था अपना. पटना एम्स में. उससे मिलके निकलते वक्त लगा था कि वह ठीक हो जाएगी. परसो शाम को जब डॉक्टर से बात हुई यशवंत भइया कि तो डॉक्टर ने कह दिया था कि अब केस हाथ से बाहर है. मंगलवार सुबह तिस्ता के भाई से बात हुई तो उसने कहा सुधार है लेकिन यशवंत भइया ने कहा कि डॉक्टर कह रहे हैं कि किडनी-लिवर के बाद शरीर के सारे ऑर्गेन भी डेड हो चुके हैं. बस वेंटिलेशन के कारण कहने भर को जिंदा है. यशवंत भइया के जरिये दोपहर आते आते मालूम चल चुका था कि अब चमत्कार वमत्कार सब भ्रम वहम है. यशवंत भइया ने दोपहर में ही कहा था कि अब आगे की तैयारी हो. लेकिन तिस्ता की मौत के इतने देर बाद भी बहुत अविश्वास के साथ ही लिख पा रहा हूँ कि वह नही है. अंतहीन पीड़ा के बीच चमकती आंखों और मुस्कुराते चेहरे के साथ उससे हुई आखिरी संवाद को कभी नही भूल पाऊंगा. (निराला बिदेशिया की वॉल से)

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