नई दिल्ली, 9 दिसम्बर | देश-विदेश में नाम कमाने वाली मशहूर भारतीय अभिनेत्री फ्रीडा पिंटो के सभी किरदारों में दमदार महिला किरदारों की झलक मिलती है। वह कहती हैं कि फिल्में चुनते समय वह इस बात का विशेष रूप से खयाल रखती हैं।  फ्रीडा ने ‘स्लमडॉग मिलेनियर’, ‘मिरल’ और आगामी फिल्म ‘तृष्णा’ में भी ऐसे ही किरदार निभाए हैं।  फ्रीडा ने एक साक्षात्कार में आईएएनएस को बताया, “मैं फिल्में चुनते वक्त एक मजबूत महिला किरदार को सबसे ज्यादा तव्वजो देती हूं।”

ऑस्कर पुरस्कार विजेता फिल्म ‘स्लमडॉग मिलेनियर’ से विश्व पटल पर पहचान पाने वालीं फ्रीडा को बॉलीवुड में महिलाओं को एक उत्पाद के रूप में दिखाए जाने पर खीझ होती है। उन्होंने कहा, “मुझे महिलाओं को बड़े पर्दे पर एक वस्तु के रूप में देखकर दिक्कत होती है। लेकिन मुझे लगता है कि इस संबंध में सिर्फ महिलाओं से हमदर्दी जताना गलत है, क्योंकि ऐसा करने से ऐसा लगेगा जैसा पुरुषों को वस्तु के रूप में पेश करना सही है।”

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि यहां थोड़ा ज्यादा ढोंग होता है।” फ्रीडा ने कहा कि दर्शकों को भी समझना चाहिए कि कलाकार पर्दे पर सिर्फ एक किरदार निभा रहे हैं। उन्होंने कहा, “फिल्मकार और कलाकार होने के नाते हमें उस विषय सामग्री के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए, जो हम पेश करते हैं, लेकिन दर्शकों को भी समझना चाहिए कि हम सिर्फ अभिनय कर रहे हैं।” फ्रीडा का मानना है कि व्यापारिक और संजीदा फिल्मों के बीच की दूरी मिट रही है।

30 वर्षीया फ्रीडा ने कहा, “मैं नहीं जानती कि बॉलीवुड में कौन सी फिल्में व्यापारिक हैं, क्योंकि यहां कुछ आर्ट हाउस की फिल्में हैं, जो मुझे पसंद आई और वे कमाऊ बन गईं।”